वित्त मंत्री ने पुलिसकर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

हिन्दुस्तान, रांची
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डीजीपी को पत्र : अतिरिक्त वाहन की मांग सुरक्षाकर्मियों की सुरक्षा के लिए की गई थी, 21 अप्रैल 2026 को लिखे पत्र का जवाब अब तक नहीं मिल सका

वित्त मंत्री ने पुलिसकर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। झारखंड सरकार के वित्त, योजना एवं विकास, वाणिज्य-कर तथा संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखकर राज्य के पुलिसकर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि उनके सुरक्षाकर्मियों के लिए अतिरिक्त वाहन की मांग उनकी खुद की व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षाकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी। मंत्री ने सोमवार को लिखे पत्र में कहा कि उन्होंने 21 अप्रैल 2026 को भी इस संबंध में पत्र लिखा था, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने इसे राज्य पुलिस की कार्य संस्कृति के विपरीत बताते हुए कहा कि अतिरिक्त वाहन की मांग जमीनी हकीकत और तार्किक कारणों पर आधारित है。

पुलिसकर्मियों की सुरक्षा पर सवाल

राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था अब सार्वजनिक चिंता का विषय बन गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पीसीआर और पेट्रोलिंग वाहनों पर केवल एक चालक और एक पुलिस पदाधिकारी तैनात रहते हैं और वे स्वयं ही असुरक्षित हैं, तो वे दूसरों को प्रभावी सुरक्षा कैसे देंगे।

पुलिस परिवार के आरोप

उन्होंने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि पुलिस परिवार की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि कई प्रभावशाली व्यक्तियों, भूमाफियाओं तथा अवैध उत्खनन से जुड़े कारोबारियों को नियमों के विपरीत पुलिस अंगरक्षक उपलब्ध कराए गए हैं। यदि ये आरोप सही हैं तो यह गंभीर मामला है और पुलिस संसाधनों के दुरुपयोग का संकेत देता है। मंत्री ने कहा कि अब जनता यह भी जानना चाहती है कि वर्तमान और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों को कितने सुरक्षाकर्मी, वाहन और अन्य पुलिस सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने इस संबंध में पारदर्शिता बरतने की आवश्यकता बताई।

नए सुरक्षा मानक लागू करने की अपील

पत्र में राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था बनाए रखने, उग्रवाद और अपराध से निपटने तथा आम जनता की सुरक्षा के लिए अग्रिम मोर्चे पर तैनात रहते हैं। यदि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा कवर मिलेगा तो वे अधिक आत्मविश्वास और दक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध होने के बावजूद यदि पुलिसकर्मी स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, तो यह पुलिस की सुरक्षा नीति की विफलता को दर्शाता है। मंत्री ने डीजीपी से पुराने सुरक्षा नियमों में बदलाव कर वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप नए सुरक्षा मानक लागू करने की अपील की, ताकि आम नागरिकों, सुरक्षा जोखिम वाले व्यक्तियों और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सके।

प्रश्न और उत्तर

✦राधाकृष्ण किशोर ने पुलिस सुरक्षा पर किससे पत्र लिखा?−
राधाकृष्ण किशोर ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखा।
Satyadev Yadav

लेखक के बारे में

Satyadev Yadav

शॉर्ट बायो: सत्यदेव यादव पिछले 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में ‘हिन्दुस्तान‘ में झारखंड के स्टेट ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं।


परिचय एवं अनुभव
सत्यदेव यादव हिंदी पत्रकारिता जगत का एक जाना-पहचाना नाम हैं, जिन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 23 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में ‘हिन्दुस्तान दैनिक’(हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के झारखंड संस्करण में स्टेट ब्यूरो चीफ के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इस भूमिका में रहते हुए वह राज्य की प्रशासनिक, राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों की व्यापक और प्रभावशाली कवरेज का नेतृत्व कर रहे हैं। एक गतिशील, परिणामोन्मुख और विश्लेषणात्मक सोच वाले पत्रकार के रूप में सत्यदेव यादव को खोजी पत्रकारिता, तथ्यपरक रिपोर्टिंग और टीम मैनेजमेंट में विशेष दक्षता प्राप्त है।


करियर का सफर (ट्रेनी रिपोर्टर से स्टेट ब्यूरो चीफ तक)
सत्यदेव यादव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2003 में ‘हिन्दुस्तान दैनिक’, फरीदाबाद से ट्रेनी रिपोर्टर के रूप में की। शुरुआती वर्षों में उन्होंने विभिन्न बीट पर काम करते हुए पत्रकारिता की बुनियादी समझ और फील्ड अनुभव हासिल किया। फिर ‘अमर उजाला’, गाजियाबाद में 2005 से करीब साढ़े पांच वर्षों तक कार्य किया, जहां ट्रेनी रिपोर्टर से स्टाफ रिपोर्टर और सब-एडिटर तक का सफर तय किया। 2010 के बाद ‘हिन्दुस्तान दैनिक’ के साथ उनका सफर लगातार आगे बढ़ता गया। गाजियाबाद में सीनियर रिपोर्टर और कॉपी एडिटर रहने के बाद वह गुरुग्राम और नोएडा में सिटी चीफ रिपोर्टर बने। 2017 से वह रांची में कार्यरत हैं। स्टेट ब्यूरो चीफ के रूप में रणनीति और टीमवर्क के जरिए झारखंड सरकार के 35 से अधिक विभागों की सफल कवरेज सुनिश्चित कर रहे हैं।


नेतृत्व, कंटेंट और विजन
स्टेट ब्यूरो चीफ के रूप में सत्यदेव यादव न सिर्फ टीम का नेतृत्व करते हैं, बल्कि स्टोरी चयन, कंटेंट पैकेजिंग और एडिटोरियल दिशा तय करने में भी उनकी अहम भूमिका होती है। वह अपनी टीम को हमेशा फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और ग्राउंड-लेवल वेरिफिकेशन पर जोर देने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका मानना है कि पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत उसकी विश्वसनीयता होती है, और यही सोच उनके काम और नेतृत्व में साफ झलकती है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि
सत्यदेव यादव ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए और जर्नलिज़्म एवं मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीतिक विज्ञान में स्नातक हैं।


विशेषज्ञता
खोजी पत्रकारिता और ग्राउंड रिपोर्टिंग
राजनीतिक विषयों पर विश्लेषण
वन पर्यावरण, वन्य जीव
बिजली, रिन्यूबल एनर्जी
शहरी मुद्दे, ट्रैफिक और इंफ्रास्ट्रक्चर रिपोर्टिंग

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