मौखिक गवाह के बिना विभागीय कार्रवाई अवैध: हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा है कि विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई में केवल दस्तावेजों के आधार पर कर्मचारी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी कृष्णानंद ठाकुर की बर्खास्तगी को खारिज किया, क्योंकि आरोपों को साबित करने के लिए मौखिक गवाहों का परीक्षण आवश्यक है।

रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई में केवल दस्तावेजों के आधार पर कर्मचारी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। आरोपों को साबित करने के लिए मौखिक गवाहों का परीक्षण आवश्यक है। इसी आधार पर अदालत ने जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी कृष्णानंद ठाकुर की सेवा से बर्खास्तगी और विभागीय अपील खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने यह आदेश कृष्णानंद ठाकुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिकाकर्ता ने वर्ष 2024 में जारी बर्खास्तगी के आदेश और वर्ष 2025 में विभागीय अपील खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी।
अदालत ने पाया कि विभागीय जांच के दौरान आरोपों को साबित करने के लिए किसी भी मौखिक गवाह का परीक्षण नहीं किया गया। केवल दस्तावेज रिकॉर्ड पर रख दिए गए, जबकि उनके सत्यापन के लिए किसी सक्षम गवाह की गवाही नहीं कराई गई। हाईकोर्ट ने कहा कि यह स्थापित विधिक सिद्धांतों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
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