प्राध्यापक बिनोद कुमार राय के पक्ष में हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला
झारखंड हाईकोर्ट ने लंगटा बाबा कॉलेज के प्राध्यापक बिनोद कुमार राय के पक्ष में फैसला सुनाया। न्यायालय ने उनकी सेवा समाप्ति को अवैध माना और उन्हें 75 प्रतिशत बकाया वेतन, वरिष्ठता और अन्य लाभ देने का आदेश दिया। मामले में न्यायालय ने विश्वविद्यालय के प्रतिकूल टिप्पणियों को भी रद्द कर दिया।

जमुआ, प्रतिनिधि। झारखंड हाईकोर्ट ने विनोबा भावे विश्वविद्यालय से संबद्ध लंगटा बाबा कॉलेज, बाबाग्राम (गिरिडीह) के प्राध्यापक बिनोद कुमार राय के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकलपीठ ने माना कि याचिकाकर्ता की सेवा समाप्ति अवैध थी और उन्हें 75 प्रतिशत बकाया वेतन, वरिष्ठता तथा अन्य सेवा लाभ दिए जाने चाहिए। अदालत ने कहा कि वर्ष 2008 में बिनोद कुमार राय को बिना नियमित विभागीय जांच की सेवा से हटाया गया था, जो कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध था। बाद में उन्हें वर्ष 2019 में पुनः सेवा में बहाल की गई, लेकिन बकाया वेतन और अन्य लाभ नहीं दिए गए थे।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को सेवा समाप्ति की तारीख से पुनर्बहाली तक 75 प्रतिशत बैक वेजेज दिए जाएं। हालांकि इस अवधि में पैरा शिक्षक के रूप में प्राप्त मानदेय की राशि इसमें से समायोजित की जाएगी। साथ ही, उनकी वेतन निर्धारण प्रक्रिया मूल नियुक्ति की तिथि से की जाए और अन्य समान प्राध्यापकों की तरह सभी वार्षिक वेतनवृद्धि एवं सेवा लाभ प्रदान किए जाएं। अदालत ने विश्वविद्यालय के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता की क्षमता पर प्रतिकूल टिप्पणी की गई थी। न्यायालय ने माना कि जब सेवा समाप्ति स्वयं अवैध थी, तब ऐसी टिप्पणियां उचित नहीं थीं। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को 12 सप्ताह के भीतर बकाया वेतन का भुगतान और वेतन पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया तो बकाया राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।


