टीजीटी शिक्षकों को समान वरीयता और वेतन देने का आदेश
12 सप्ताह में समान वरीयता और वेतन लाभ देने का आदेश, सरकार की देरी का नुकसान शिक्षक नहीं भुगत सकते, प्रशासनिक विलंब के कारण प्रार्थियों की नियुक्ति वर्

रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) नियुक्ति से जुड़े शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार की प्रशासनिक लापरवाही का नुकसान अभ्यर्थियों को नहीं उठाना पड़ेगा। अदालत ने प्रशासनिक कारणों से करीब तीन वर्ष की देरी से नियुक्त हुए शिक्षकों को उनके साथ चयनित अन्य अभ्यर्थियों के समान वरीयता, अपग्रेड वेतनमान और वेतन वृद्धि का लाभ देने का निर्देश दिया है। जस्टिस दीपक रोशन के कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह 12 सप्ताह में प्रार्थियों को समान वरीयता, अपग्रेड वेतनमान और वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ प्रदान करे। इस संबंध में अजय कुमार समेत आठ याचिकाओं पर सुनवाई करते कोर्ट ने फैसला सुनाया। प्रार्थी पलामू, गढ़वा, हजारीबाग, कोडरमा, बोकारो, चतरा, धनबाद और गिरिडीह समेत विभिन्न जिलों से संबंधित हैं। वर्ष 2020 से 2023 तक 3,469 स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति की गई है।
मामले का विवरण
मामले में प्रार्थियों का कहना था कि वह सभी उसी टीजीटी नियुक्ति परीक्षा (विज्ञापन संख्या-21/2016) के माध्यम से चयनित हुए थे, जिससे अन्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति वर्ष 2019 में हुई थी। हालांकि, सरकार की प्रशासनिक देरी के कारण उन्हें वर्ष 2021 में नियुक्ति मिली। ऐसे में उनकी वरिष्ठता प्रभावित हो गई और वे अपने ही बैच के शिक्षकों से कनिष्ठ हो गए।
सुनवाई की प्रक्रिया
सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता सुमित गडोदिया और अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने अदालत को बताया कि नियुक्ति में हुई देरी के लिए अभ्यर्थी किसी भी तरह जिम्मेदार नहीं थे। इस मामले में किसी अदालत का स्थगन आदेश भी नहीं था, फिर भी प्रशासनिक कारणों से नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए। बाद में प्रार्थियों को नियुक्ति पत्र जारी कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा, जिसके बाद वर्ष 2021 में उनकी नियुक्ति हुई।


