

रांची, संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने कहा है कि वैवाहिक संबंध समाप्त होने के बाद भी आर्थिक रूप से आश्रित पत्नी को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए उचित स्थायी गुजारा भत्ता मिलना चाहिए। इसी सिद्धांत को आधार बनाते हुए अदालत ने एसएसबी के एक कांस्टेबल को अपनी पहली पत्नी को 30 लाख रुपये एकमुश्त स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है। राशि का भुगतान 12 महीने में चार समान किस्तों में करना होगा और पहली किस्त दो महीने के भीतर देनी होगी। यह आदेश जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने लातेहार फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान दिया।
पति ने पहले ही दूसरी शादी कर ली है, इसलिए दोनों के साथ रहने की संभावना समाप्त हो चुकी है। ऐसे में अदालत ने विवाद को केवल स्थायी गुजारा भत्ते तक सीमित मानते हुए निर्णय सुनाया। खंडपीठ ने कहा कि पत्नी के पास आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं है, जबकि पति नियमित वेतनभोगी कर्मचारी है। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि स्थायी गुजारा भत्ता तय करने का कोई निश्चित गणितीय फार्मूला नहीं हो सकता। पत्नी की उम्र, भविष्य की आवश्यकताओं, पति की आय और दोनों के जीवन स्तर को देखते हुए 30 लाख रुपये का एकमुश्त भुगतान न्यायसंगत और उचित है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि तय समय पर राशि नहीं मिलने पर पत्नी कानून के अनुसार आदेश के पालन के लिए सक्षम अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है।