सिविल जज परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक से हाईकोर्ट का इनकार
जेपीएससी और सरकार से जवाब तलब, 29 सितंबर को होगी मामले की अगली सुनवाई। प्रार्थियों की ओर से अदालत को बताया गया कि सिविल जज जूनियर डिवीजन की उक्त परीक्

रांची, विशेष संवाददाता। सिविल जज जूनियर डिवीजन परीक्षा (विज्ञापन संख्या 22/2023) की नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने की अधिसूचना को निरस्त करने के आग्रह वाली तीन याचिकाओं पर सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने फिलहाल सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने मामले में झारखंड सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी। याचिकाकर्ता आदित्य भास्कर और आयुष कुमार वर्मा समेत अन्य की ओर से दाखिल याचिकाओं में सिविल जज जूनियर डिवीजन की नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के सरकार के आदेश को चुनौती दी गई है। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता निलेश कुमार, अधिवक्ता एके कश्यप, अभय आनंद और सोनल ने पक्ष रखा। प्रार्थियों की ओर से अदालत को बताया गया कि सिविल जज जूनियर डिवीजन की उक्त परीक्षा में टीडीपीएल की कोई भूमिका नहीं रही है। इसलिए परीक्षा में किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका नहीं है। ऐसे में पूरी परीक्षा प्रक्रिया को रद्द करने संबंधी सरकार के आदेश पर रोक लगाई जानी चाहिए。
सीआईडी की जांच के बाद सरकार ने लिया था निर्णय
सीआईडी की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने उन सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी, जिनमें टीडीपीएल की भूमिका रही थी। इसके साथ ही वर्ष 2014 से अब तक आयोजित नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने की भी घोषणा की गई थी। इसी के मद्देनजर कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने परीक्षा रद्द करने, परीक्षा प्रक्रिया स्थगित करने और विभिन्न परीक्षाओं को जांच के दायरे में शामिल करने से संबंधित अधिसूचना जारी की थी। अधिसूचना के अनुसार 22 परीक्षाओं को रद्द करने, छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में शामिल करने का निर्णय लिया गया है。


