सीएनटी एक्ट के उल्लंघन पर जमीन का हस्तांतरण मान्य नहीं : हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ के पतरातू अंचल की आदिवासी जमीन से जुड़ी याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि सीएनटी एक्ट के तहत आदिवासी जमीन का हस्तांतरण वैध नहीं हो सकता। प्रार्थियों ने इस जमीन को 1970 में खरीदी थी, जबकि दूसरे पक्ष ने 2003 में कब्जे का दावा किया है।

रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ जिले के पतरातू अंचल की आदिवासी जमीन से जुड़े मामले में दाखिल याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने कहा कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) के तहत आदिवासी जमीन के हस्तांतरण पर विशेष प्रतिबंध है और कानून का उल्लंघन कर किया गया हस्तांतरण वैध नहीं माना जा सकता। अदालत ने रिवीजन अथॉरिटी के आदेश को सही ठहराते हुए रिट याचिका खारिज कर दी। मामला रामगढ़ के घुटवा गांव स्थित खाता नंबर 42 के प्लॉट नंबर 1273 की 0.92 एकड़ जमीन से जुड़ा है। प्रार्थियों के अनुसार, यह जमीन वर्ष 1970 में सादिक मियां ने रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए खरीदी थी और तब से वे जमीन पर कब्जे में थे। बाद में जमीन का नामांतरण कराने के लिए आवेदन भी दिया गया, लेकिन नामांतरण नहीं हो सका。
दूसरे पक्ष का दावा
वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से दावा किया गया कि उसने इसी प्लॉट की 0.67 एकड़ जमीन वर्ष 2003 में खरीदी थी। इसके लिए तत्कालीन उपायुक्त से अनुमति भी ली गई थी और उसके नाम पर म्यूटेशन किया गया था। उसका कहना था कि जमीन खरीदने के छह महीने के भीतर उसे जमीन से बेदखल कर दिया गया। इसके बाद उसने सीएनटी एक्ट की धारा 46(4-ए) के तहत जमीन वापसी के लिए आवेदन दिया।
अदालत का निर्णय
याचिकाकर्ताओं ने इस दावे का विरोध करते हुए कहा था कि संबंधित जमीन आदिवासी जमीन है और दूसरे पक्ष की ओर से किया गया दावा समय-सीमा के बाहर है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि बेदिया समुदाय अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल नहीं है। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने 6 सितंबर 1950 की संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि बिहार के लिए जारी सूची में बेदिया को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया गया था。


