बिना निगम की अनुमति के नहीं बजेंगे डीजे-लाउडस्पीकर
झारखंड सरकार ने नगर निगम की अनुमति के बिना शहर में डीजे और लाउडस्पीकर बजाने पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत जुर्माने और कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। सभी नगर निगमों को साइलेंस जोन बनाने और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी दी गई है।

धनबाद, प्रमुख संवाददाता। नगर निगम की अनुमति के बिना अब शहर में डीजे और लाउडस्पीकर नहीं बजेंगे। प्रधान सचिव ने सभी नगर निगम को पत्र लिखकर कार्रवाई का निर्देश दिया है। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत निगम को कार्रवाई का अधिकार मिला है।
ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए कदम
राज्य सरकार ने झारखंड में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर बड़ी पहल की है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने सभी नगर निकायों को झारखंड नगरपालिका अधिनियम-2011 के तहत ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के प्रावधान और वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का अक्षरशः पालन करने का निर्देश दिया है। नगर निगम की अनुमति के बिना अब शहर में डीजे और लाउडस्पीकर बजाने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इस संबंध में राज्य शहरी विकास अभिकरण के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने राज्य के सभी नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त, उप नगर आयुक्त और कार्यपालक पदाधिकारियों को आदेश जारी किया है। पत्र में स्पष्ट कहा गया कि झारखंड नगरपालिका अधिनियम-2011 के तहत ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए प्रावधान किए गए हैं, लेकिन उनका प्रभावी अनुपालन नहीं हो रहा है। अधिनियम के तहत सार्वजनिक शांति भंग करना या ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण आदेश का उल्लंघन करना अपराध है। उल्लंघन करने वाले व्यक्ति या समूह पर पांच हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं नगर आयुक्त या कार्यपालक पदाधिकारी की लिखित अनुमति के बिना लाउडस्पीकर बजाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। नियम तोड़ने पर दो हजार रुपए तक का जुर्माना होगा।
साइलेंस जोन बनाने का निर्देश
तीन माह के अंदर साइलेंस जोन बनाने का निर्देश: राज्य सरकार ने वन, पर्यावरण विभाग द्वारा छह मई 2026 को संकल्प संख्या 1894 द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का भी हवाला दिया है। सभी नगर निकायों को उपायुक्त के दिशा-निर्देश में तीन महीने के भीतर अपने क्षेत्र में साइलेंस जोन चिह्नित करने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने कहा कि संबंधित उपायुक्त अपने अधिकार क्षेत्र में इसके कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेंगे और एसओपी के अनुसार सभी प्रावधानों का अनुपालन कराएंगे। नगर निगम को औद्योगिक क्षेत्र, वाणिज्यिक क्षेत्र, आवासीय क्षेत्र और साइलेंस जोन का निर्धारण करना होगा। साथ ही सभी जोन में साइन बोर्ड लगाना होगा। वहीं अनुमान्य ध्वनि स्तर का बोर्ड भी लगाना होगा。


