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1 जुलाई, 2020|6:54|IST

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बॉलीवुड में आउटसाइडर से लेकर OTT पर फिल्मों की रिलीज तक, जानें विभिन्न मुद्दों पर क्या-क्या बोलीं एक्ट्रेस तापसी पन्नू

विशेष पेशकश 'जीतेगा हिन्दुस्तान' के तहत बुधवार को एक्ट्रेस तापसी पन्नू ने 'हिन्दुस्तान' के प्रधान संपादक शशि शेखर के साथ बॉलीवुड में आउटसाइडर से लेकर ओटीटी पर रिलीज हो रहीं फिल्मों तक, के मुद्दों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। उन्होंने बताया कि बॉलीवुड में कुछ घरानों, परिवारों की वजह से उनके हाथ से भी कई फिल्में गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लोग स्टारकिड्स की फिल्मों को देखने के लिए पहले से ही टिकट बुक करा लेते हैं, जबकि आउटसाइडर्स के लिए ऐसा नहीं करते हैं। इस इंटरव्यू में तापसी ने बताया कि सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग से उन्हें अब ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। पढ़ें, एक्ट्रेस तापसी पन्नू का विशेष इंटरव्यू:  

सवाल: कोरोना काल में कैसे कटता है आपका समय?

जवाब: शुरुआत में काफी डर गई थी कि कैसे समय बीतेगा? जबसे काम करना शुरू किया है तबसे काफी कम समय ही घर पर बिताया है। यह पहली बार ऐसा हुआ है। मैंने टाइमटेबल बनाकर खुद को व्यस्त रखा। दिमाग को कभी महसूस नहीं होने दिया कि कुछ अलग हो रहा है। अब काम पर जाने को मिस करती हूं।

सवाल: बड़ी-बड़ी फिल्में ओटीटी पर रिलीज हो रही हैं। इसपर क्या असर पड़ेगा?

जवाब: मुझे नहीं लगता है कि लंबे समय तक इसका असर रहेगा। अभी कुछ समय के लिए ही ऐसा हो रहा है। अगर यह लंबे समय तक हुआ कि ओटीटी पर फिल्म रिलीज होगी, तब काफी कुछ बदल जाएगा। स्टार सिस्टम बदल जाएगा। अब फिल्म को देखकर यह चर्चा होगी कि फिल्म देखने लायक है या नहीं, नाकि वीकेंड कलेक्शन पर। 

 

सवाल: ओटीटी पर फिल्मों के रिलीज होने से क्या एक्टर्स की फीस पर कोई असर पड़ेगा?

जवाब: अगर ओटीटी पर फिल्में रिलीज होती हैं तो अगले एक साल के लिए हर वर्ग पर असर पड़ सकता है। हालांकि, अगर लंबे समय तक ओटीटी पर ही फिल्में आती हैं, तब इसपर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इसके पीछे वजह यह है कि अभी तक हॉल में ही फिल्में रिलीज होती थी, इसलिए ओटीटी पर कमाई के ज्यादा तरीके नहीं ढूंढे गए।

सवाल: क्या इससे एंटरटेनमेंट के ज्यादा दरवाजे खुलेंगे और कुछ शहरों पर ही निर्भरता कम होगी?

जवाब: ऐसा संभव हो सकता है। ऐसा पहले ही हो रहा था। हालांकि, जैसा मुंबई में इंफ्रास्ट्रचर है, वह किसी भी अन्य शहर में बनाना कम समय में बहुत आसान नहीं होगा। दूसरी जगह शूटिंग हो रही थीं। मेरी कई फिल्में अलग-अलग शहर में ही शूट हुई हैं।

सवाल: इस सीरीज का नाम है 'जीतेगा हिन्दुस्तान'। क्या आपको ऐसा लगता है कि ऐसा ही होगा?

जवाब: बिल्कुल, भारतीयों में ऐसी क्षमता है कि किसी भी मुश्किल समय में हम कोई न कोई तरीका निकाल ही लेते हैं और उस कठिन समय से निकल आते हैं। हम रोजाना कई मुश्किलों का सामना करते हैं। बाहरी लोगों को समझ नहीं आता है कि आखिर कैसे भारतीय ऐसा कर लेते हैं। मैंने अलग-अलग देशों में काम किया है, इसलिए मैं बता सकती हूं कि भारतीय कैसे तरीके निकाल लेते हैं। बस समय की बात है, हमें पूरा भरोसा है कि हिन्दुस्तान जीतेगा।

सवाल: क्या आप शुरुआत से ही बॉलीवुड में एक्ट्रेस बनना चाहती थीं?

जवाब: नहीं, मैंने कभी बचपन में एक्टिंग नहीं की थी और न ही शौक था। मेरे माता-पिता ऐसे भी नहीं थे कि वे हमें ज्यादा फिल्में दिखाते। घरवाले भी फिल्में नहीं देखते थे और न ही मुझे दिखाते थे। कॉलेज के समय में मैंने फिल्में देखनी शुरू की हैं। भगवान ने मुझे धीरे-धीरे बॉलीवुड की ओर भेजा। इसके बाद ही लगा कि इसी प्रोफेशन में मुझे जाना था।

सवाल: कॉलेज के समय की कुछ शैतानियां शेयर कीजिए।

जवाब: मैं कॉलेज में क्लासेस बहुत कम अटैंड करती थी। मैं कॉलेज में डांस टीम में थी, इन सब में मेरा समय काफी निकल जाता था। मेरे टीचर्स भी काफी परेशान थे कि मैं क्लासेस अटैंड नहीं करती। लेकिन मेरे नंबर ठीक आते थे। एक बार मेरे एचओडी ने मुझे वॉर्निंग दे दी थी और कहा था कि देखते हैं कि कैसे पास होती हो। इसके बाद हमने एक प्रोजेक्ट बनाया, जिसे पहले कॉलेज में किसी ने नहीं बनाया था। प्रोजेक्ट में ऐप बनाई थी और इसके चलते वे ज्यादा सवाल नहीं पूछ सके। हालांकि, कॉलेज में कई बार डांट जरूर पड़ी।

सवाल: आपकी जिंदगी बदलने वाला लम्हा कब आया और कैसे पता चला?

जवाब: ऐसा दो बार हुआ। पहला तब, जब करियर की पहली फिल्म रिलीज हुई थी। दस साल पहले आज के ही दिन मेरी पहली तेलुगु फिल्म रिलीज हुई थी। जनता का रिएक्शन देखकर मेरे लिए लाइफ चेंजिंग मूवमेंट था। दूसरा, जब पिंक फिल्म रिलीज हुई तो कुछ हफ्ते पहले स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी। उस हफ्ते मुझे मिले रिएक्शन मेरी जिंदगी में काफी अहम थे। 

सवाल: मुंबई आने के लिए आपने साउथ का रास्ता चुना। इसकी कहानी बताएं?

जवाब: मैंने कभी इस फील्ड में आने का सोचा नहीं था। कुछ पैसे कमाने के लिए मैंने मॉडलिंग शुरू कर दी थी। इसी बीच मेरे पास एक्टिंग के लिए फोन आने लगे थे। इसके बाद इंजीनियरिंग खत्म हुई तो ऑफर साइन किए। हालांकि, हिंदी से भी ऑफर आए थे लेकिन जिन्होंने ऑफर दिए, उनके नाम सुने नहीं थे, जिसकी वजह से मैंने साउथ से करियर की शुरुआत की।

सवाल: साउथ और बॉलीवुड के कल्चर में क्या अंतर दिखा?

जवाब: साउथ में  पहली फिल्म के बाद ही मुझे स्टार का दर्जा मिलने लगा था। लेकिन जब मैं यहां आई तब मुझे पता चला कि इन लोगों के लिए कुछ भी नहीं हैं। वहां के हिट एक्टर्स के लिए यहां वैल्यू ज्यादा नहीं थी। शुरुआत के समय में मुझे यह थोड़ा अजीब लगता था।

सवाल: कुछ परिवारों, घरानों को लेकर चर्चा है कि वे फिल्मों को चलने नहीं देते। क्या आपके साथ ऐसा हुआ है?

जवाब: हां, इसके चलते मेरे हाथ से कई फिल्में गई हैं। मुझे पता था कि ऐसा होगा। मेरा सवाल है कि जब किसी आउटसाइडर की फिल्म आती है तो क्या जनता पहले से फिल्म टिकट बुक कराती है? जब स्टारकिड लॉन्च होते हैं तो पहले से टिकट बुक कराए जाते हैं। वहीं, मीडिया भी आउटसाइडर के मुकाबले स्टारकिड को ज्यादा कवर करती है।

सवाल: सुशांत सिंह राजपूत ने कम समय में कई हिट फिल्में दी थीं, जिसकी वजह से कुछ नुकसान भी हुए। सफलता और चैलेंज के बीच में कैसे सामांजस्य बैठाएं?

जवाब: वर्कप्रेशर सभी को होता है, लेकिन यह आपके हाथ में है कि आप उस प्रेशर को खुद पर कितना हावी होने दे रहे हैं। सुशांत को देखकर लोग कह रहे हैं कि उन्हें क्या परेशानी हो सकती है। उन्होंने कई हिट फिल्में दी हैं, उनकी आखिरी फिल्म भी सक्सेसफुल थी। लेकिन हर बार सक्सेस नहीं बताता कि आपका मेंटल हेल्थ कैसा है। जरूरी नहीं सक्सेस के हिसाब से आप खुश और दुखी हों। हर सक्सेसफुल इंसान दिल से खुश है, ये जरूरी नहीं। आप सक्सेस और असफलता को खुद पर कितना हावी होने देते हैं, ये आपके हाथ पर होता है। हां, कहना आसान है और करना मुश्किल होता है। लेकिन अगर आप ऐसा कर पाते हैं तो आप अपनी जिंदगी के मुश्किल समय से आसानी से निकल जाते हैं।

सवाल: एक फिल्म में आपके पैसे कम करने वाले किस्से को बताएं?

जवाब: मेरे साथ कई ऐसी घटनाएं हुईं, जब मैं अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट के लिए अड़ गई थी। मैं बड़ी एक्ट्रेस बनने के लिए सेल्फी रिस्पेक्ट को दांव पर नहीं लगा सकती। एक फिल्म में मुझसे कहा गया कि हीरो की जो पिछली फिल्म थी, वह चली नहीं थी, इस वजह से आप फीस कम कर लीजिए। चूंकि, हीरो की फिल्म नहीं चली तो मुझसे उम्मीद की गई कि मैं फीस कम कर लूं। यह मुझे काफी खराब लगा। इसी तरह एक डायलॉग भी चेंज करने को कहा गया कि जो मैं बोल रही हूं, वह हीरो को पसंद नहीं आ रहा है। ऐसे में मैंने इसपर भी सवाल खड़े किए। जब फिल्म रिलीज हुई, तो वह डायलॉग किसी और से डब कराया गया था। 

सवाल: एक प्रदर्शन में आप अनुराग कश्यप के साथ दिखी थीं। क्या वजह थी?

जवाब: छात्रों को लेकर वह प्रदर्शन था। कई छात्रों पर हिंसा हुई थी। उन्हें चोट लगी थी। इसकी वजह से मैंने उस प्रदर्शन में उनके समर्थन में भाग लिया। मैं यह दिखाने गई थी कि छात्रों के साथ हिंसा करना गलत है और मैं उसे सपोर्ट नहीं करती हूं।

सवाल: क्या इस प्रदर्शन में शामिल होने के बाद कोई प्रेशर आया? 

जवाब: मेरे ऊपर प्रेशर आते रहते हैं। पहला तो मैं लड़की हूं, दूसरा प्रोफेशन और तीसरा ओपिनयन, ये तीन चीजें हैं जिससे आपको आलोचना मिलगी ही। मैं इसके लिए पूरी तरह से तैयार रहती हूं। आलोचना करने वाले हर मुद्दे पर आलोचना करने लगे हैं। इससे मुझे फर्क नहीं पड़ता है। 

सवाल: ट्रोलिंग से आपको परेशानी नहीं होती है?

जवाब: शुरुआत में मुझे लगता था कि ट्रोल मुझे ऐसे क्यों बोल रहे हैं। लेकिन अब वे मेरी बातों को घुमा फिरा कर उस बात पर ले आते हैं जो उन्हें पसंद है। वे अपने स्तर पर घसीटेंगे और फिर आपको हरा देंगे। इसलिए ये लोग क्या बोल रहे हैं, उससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है। 

 

 

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  • Web Title:Jeetega Hindustan Live Updates: bollywood actress taapsee pannu talk to hindustan editor in chief shashi shekhar