फरक्का जल संधि बिहार हित में नहीं, नहीं करे केन्द्र नवीनीकरण : जिशु सिंह
सीवान, हिन्दुस्तान संवाददाता।रेलवे स्टेशन पर बढ़ी यात्रियों की भीड़रेलवे स्टेशन पर बढ़ी यात्रियों की भीड़रेलवे स्टेशन पर बढ़ी यात्रियों की भीड़

सीवान, हिन्दुस्तान संवाददाता। वर्ष 1996 में हुए फरक्का जल संधि को बिहार हित में नहीं बताते हुए जदयू नेताओं ने केन्द्र सरकार से इस वर्ष के आखिरी में होने वाले इस संधि का नवीकरण नहीं करने की मांग की। जदयू नेताओं ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री व पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार जल अधिकारों की आवाज सदैव उठाते रहे हैं।
प्रेसवार्ता के दौरान विचार
बहरहाल, आईबी में प्रेसवार्ता के दौरान जदयू जिलाध्यक्ष विकास कुमार सिंह उर्फ जिशु सिंह, विधायक हेमनरायण साह, इंद्रदेव सिंह पटेल व भीष्म प्रताप सिंह ने फरक्का जल संधि पर पार्टी के विचार को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह संधि कहीं से भी बिहार हित में नहीं है। जदयू जिलाध्यक्ष ने कहा कि फरक्का बैराज व फरक्का जल संधि के कारण बिहार को पिछले तीन दशकों से इसके गंभीर दुष्परिणामों का सामना करना पड़ रहा है। विकास की नई गति के साथ आगे बढ़ रहा बिहार अपने जल हितों के सवाल पर किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने इसे सदन प्रमुखता से उठाया है, विदेश मंत्री ने सकारात्मक आश्वाशन दिया है।
संविदा की इतिहास
प्रेसवार्ता में जिला प्रवक्ता सुनील कुमार, रमेश यादव आदि मौजूद थे। 12 दिसंबर 1996 को फरक्का जल संधि के दौरान बिहार में राजद सरकार जदयू विधायक हेमनरायण साह ने कहा कि पानी की कमी व सुखाड़ के महीने में जनवरी से मई के बीच बक्सर में गंगा नदी में सिर्फ 400 क्यूमेक पानी आता है। संधि के नियम के अनुसार 1,500 क्यूमेक पानी बांग्लादेश को देना पड़ता है। इस कमी को पूरा करने के लिए बिहार को अपनी आंतरिक नदियों का पानी गंगा में छोड़ना पड़ता है। इससे राज्य में सिंचाई, पेयजल व उद्योगों के लिए पानी की भारी कमी हो जाती है। बिहार के हिस्से गाद व बांग्लादेश को पानी मिलता है। विधायक इंद्रदेव सिंह पटेल ने कहा कि 12 दिसंबर 1996 फरक्का जल संधि हुई, उस समय राजद का शासन था। इसका परिणाम रहा कि आज तक बिहार को उस संधि से हुई परेशानी को झेलना पड़ता है। मुंगेर समेत उत्तर बिहार के कई जिलों में हर साल गंभीर बाढ़ व भूमि कटाव की समस्या पैदा होती है।


