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हिंदी न्यूज़ देशडिंपल यादव के लिए प्रचार में क्यों उतरे जदयू नेता? नीतीश की 'विपक्षी एकता' का प्लान समझिए

डिंपल यादव के लिए प्रचार में क्यों उतरे जदयू नेता? नीतीश की 'विपक्षी एकता' का प्लान समझिए

जदयू ने अगस्त में भाजपा के साथ गठबंधन तोड़कर एक बार फिर से राजद से हाथ मिला लिया। उस घटनाक्रम के बाद नीतीश ने राष्ट्रीय भूमिका के लिए अपनी महत्वाकांक्षाओं को स्पष्ट कर दिया है।

डिंपल यादव के लिए प्रचार में क्यों उतरे जदयू नेता? नीतीश की 'विपक्षी एकता' का प्लान समझिए
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSat, 03 Dec 2022 09:14 PM
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उत्तर प्रदेश के मैनपुरी संसदीय क्षेत्र में शनिवार शाम को जोरदार प्रचार अभियान समाप्त हो गया। इस चुनाव प्रचार में समाजवादी पार्टी के लिए विपक्षी नेता भी प्रचार करते नजर आए। इन्हीं में से एक जद(यू) के वरिष्ठ नेता के सी त्यागी भी शामिल थे। त्यागी ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश में दिवंगत मुलायम सिंह यादव के मैनपुरी निर्वाचन क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रही डिंपल यादव के लिए प्रचार किया। उन्होंने कहा कि वह पार्टी नेता नीतीश कुमार और "विपक्षी एकता" का संदेश लेकर आए हैं। विपक्ष 2024 के आम चुनावों से पहले एकजुट होने के तमाम प्रयास कर रहा है। डिंपल के लिए केसी त्यागी का प्रचार इसी बात का संकेत है। 

जदयू ने अगस्त में भाजपा के साथ गठबंधन तोड़कर एक बार फिर से राजद से हाथ मिला लिया। उस घटनाक्रम के बाद नीतीश ने राष्ट्रीय भूमिका के लिए अपनी महत्वाकांक्षाओं को स्पष्ट कर दिया है। तब से बिहार के मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव सहित पार्टियों के कई नेताओं से मुलाकात की है। वह अपनी निधन से पहले मुलायम सिंह यादव से भी मिले थे। कहा जा रहा है कि नीतीश मुलायम के उत्तराधिकारी व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को मनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। 

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नीतीश जल्द ही विपक्षी दलों को एक साझा मंच पर इकट्ठा करने की कोशिश फिर से शुरू करेंगे। मैनपुरी लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले विधानसभा क्षेत्र जसवंत नगर में जद (यू) के प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव त्यागी ने गुरुवार को कहा, "मैं नीतीश कुमार का संदेश लेकर आया हूं। हम यहां विपक्षी एकता की एक बड़ी मिसाल देख सकते हैं। किसी भी क्षेत्रीय दल या राष्ट्रीय दल (भाजपा को छोड़कर) ने डिंपल यादव के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारा है।"

साथ ही उन्होंने लोगों से अखिलेश के हाथों को मजबूत करने का भी आह्वान किया। त्यागी ने कहा, "याद कीजिए, 1990 के दशक के मध्य में मुलायम सिंह यादव विधानसभा चुनाव हारने के बाद कैसे केंद्र में चले गए और केंद्रीय रक्षा मंत्री बने।" द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए, जेडी (यू) नेता ने कहा: "मैंने जो कहा वह हमारे 'मिशन नीतीश 2024' का हिस्सा है। 2024 में राष्ट्रीय राजनीति में अखिलेश की निश्चित रूप से बड़ी भूमिका है।"

त्यागी ने यह भी कहा कि विपक्षी एकता न केवल यूपी में मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में, बल्कि रामनगर और खतौली उपचुनाव में भी आकार लेती दिख रही है, जहां सपा-रालोद उम्मीदवार ही भाजपा के खिलाफ मैदान में हैं। जद (यू) नेता ने कहा कि मुलायम सिंह की मृत्यु के बाद नीतीश ने अखिलेश और उनके परिवार से मुलाकात की थी। नीतीश ने यादव परिवार के भीतर मनमुटाव को दूर करने में भी अपना योगदान दिया। 

इसी तरह, नीतीश ने हरियाणा के पूर्व सीएम और इनेलो नेता ओम प्रकाश चौटाला को भी परिवार के सदस्यों को एक साथ लाने की सलाह दी थी। चौटाला परिवार के कुछ नेता भाजपा के साथ गठबंधन में हैं। त्यागी ने कहा, "हम पारिवारिक एकता, पार्टी एकता और राष्ट्रीय एकता को देख रहे हैं।" बिहार जद (यू) के एक नेता ने दोहराया कि इस स्तर पर यह सवाल उठने का कोई कारण ही नहीं था कि विपक्ष का चेहरा कौन होगा। उन्होंने कहा, “भले ही नीतीश विपक्षी दलों को एक साथ लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन यह किसी एक व्यक्ति को स्थापित करने के बारे में नहीं है। सबसे पहले, हम कांग्रेस के साथ एक मजबूत भाजपा विरोधी मंच चाहते हैं।"

मैनपुरी की बात करें तो इस लोकसभा क्षेत्र में कुल 17 लाख से अधिक मतदाता हैं जिनमें से 3.40 लाख से अधिक दलित मतदाता हैं। यह उपचुनाव पांच दिसंबर को होगा। यह उपचुनाव सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन के चलते कराया जा रहा है जो मैनपुरी से सांसद थे। इस उपचुनाव में सपा ने डिंपल यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने रघुराज सिंह शाक्य को मैदान में उतारा है। राजनीतिक दलों का दावा है कि मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र में कुल दलितों में 1.20 लाख जाटव, कठेरिया (70,000), दिवाकर (80,000) और बघेल (80,000) मतदाता शामिल हैं। मायावती की बसपा ने इस सीट पर होने वाले उपचुनाव में पार्टी का कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है और कांग्रेस भी इस उपचुनाव से दूर है। इसलिए यहां मुकाबला मुख्य रूप से सपा बनाम भाजपा के बीच है।

दोनों प्रतिद्वंद्वी पार्टियां इस मुकाबले में दलितों के समर्थन का दावा कर रही हैं। अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने कहा है कि मुलायम सिंह यादव ने कभी जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया और इसलिए मतदाता डिंपल यादव का समर्थन करेंगे और वह रिकॉर्ड अंतर से जीतेंगी। भाजपा नेताओं ने कहा है कि दलित समुदाय के मतदाता पार्टी के सुशासन और योजनाओं के कारण शाक्य का समर्थन करेंगे।