जटायु के साहस से सजेगा नाथ नगरी में मातृशक्ति का अनूठा उद्यान
नाथ नगरी में जटायु उद्यान का निर्माण होगा, जो मातृशक्ति के सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक बनेगा। उद्यान में महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के लिए संकल्प प्रांगण होगा। इसमें जटायु की विशाल प्रतिमा और अन्य सुविधाएं मौजूद होंगी। कार्यक्रम रक्षाबंधन पर आयोजित किए जाएंगे, जो नारी सुरक्षा के प्रति समाजिक दायित्व को प्रेरित करेंगे।

नाथ नगरी में अब जटायु के साहस,धैर्य और त्याग की गाथा मातृशक्ति के सम्मान और सुरक्षा के संदेश से जुड़ेगी। नाथ कॉरिडोर के अंतर्गत आदिनाथ चौक के पास करीब 10 हजार वर्गमीटर भूमि पर अनूठे उद्यान के निर्माण की परिकल्पना तैयार की गई है। यह उद्यान मुख्यमंत्री के मिशन शक्ति विजन को नया आयाम देने के साथ शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करने की तैयारी है। गुरुवार को बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडेय ने अधिकारियों के साथ स्थलीय निरीक्षण कर पार्क निर्माण की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उपाध्यक्ष ने कहा कि जटायु ने माता सीता की रक्षा के लिए रावण से युद्ध करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। उनका यह त्याग नारी की गरिमा और रक्षा के लिए सर्वोच्च साहस का प्रतीक है। रामायण में माता सीता की रक्षा के लिए रावण से युद्ध करते हुए जटायु ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। इसी साहस और त्याग को उद्यान की अवधारणा का आधार बनाया गया है। उद्देश्य है कि यहां आने वाला हर व्यक्ति नारी सम्मान,सुरक्षा और मातृशक्ति के प्रति अपने सामाजिक दायित्व का संदेश लेकर जाए। उद्यान में संकल्प प्रांगण बनाया जाएगा,जहां नागरिक नारी की गरिमा,सम्मान और सुरक्षा की रक्षा का संकल्प ले सकेंगे। रक्षाबंधन के अवसर पर जटायु के बलिदान को नारी सुरक्षा के सामाजिक दायित्व से जोड़कर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाने की परिकल्पना है.
शक्ति पथ से वीरांगना चौक तक खास आकर्षण
उद्यान में शक्ति पथ पर प्रेरक संदेश,विचार और कलात्मक स्थापनाएं होंगी। शक्ति रंगमंच पर जागरूकता कार्यक्रम,आत्मरक्षा प्रशिक्षण और संवाद आयोजित किए जा सकेंगे। वहीं वीरांगना चौक और वीरांगना उद्यान समाज और राष्ट्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को समर्पित होंगे।उद्यान के बीचोंबीच विशाल जटायु प्रतिमा स्थापित की जाएगी। प्रतीकात्मक पंखों के साथ फव्वारे, जल तत्व और आकर्षक प्रकाश व्यवस्था परिसर को भव्य स्वरूप देंगे। बच्चों के लिए खेल क्षेत्र, भोजन प्रांगण और विश्राम की सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी.
नाथ परंपरा से जुड़ेगा मातृशक्ति का संदेश
नाथ परंपरा में मां पार्वती को शक्ति स्वरूप माना जाता है। इसी शक्ति भाव को जटायु के साहस और नारी रक्षा के संदेश से जोड़कर उद्यान को मातृशक्ति के सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक बनने की योजना है.
जटayu ने माता सीता की रक्षा के लिए प्राणों का बलिदान देकर नारी सम्मान और सुरक्षा का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत किया। प्रयास है कि उनके साहस और त्याग को आधुनिक समाज में नारी सम्मान के संदेश से जोड़ा जाए.
- सौम्या पांडेय,उपाध्यक्ष बीडीए


