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जम्मू में आतंकी हमलों के पीछे कौन? PAK आतंकियों की मदद कर रहे स्थानीय दहशतगर्द; इस ऐप का ले रहे सहारा

सूत्रों ने खुलासा किया है कि पाकिस्तानी आतंकवादी भौगोलिक इलाके की जानकारी, संवाद और अपने लक्ष्यों का पता लगाने के लिए अल्पाइन क्वेस्ट मोबाइल ऐप और चीनी अल्ट्रासेट हैंडसेट का भी सहारा ले रहे हैंं।

जम्मू में आतंकी हमलों के पीछे कौन? PAK आतंकियों की मदद कर रहे स्थानीय दहशतगर्द; इस ऐप का ले रहे सहारा
Madan Tiwariरवि कृष्णन खजुरिया,जम्मूWed, 10 Jul 2024 05:40 PM
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जम्मू में आतंकी हमलों में बढ़ोतरी के बीच सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों का मानना ​​है कि दो से तीन स्थानीय आतंकवादी, जो डोडा से पाक अधिकृत जम्मू और कश्मीर (पीओजेके) में घुसपैठ कर आए थे, हाल के दिनों में पाकिस्तानी आतंकवादियों के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए से घुसपैठ कर चुके हैं और कठुआ, उधमपुर और डोडा जिलों में सफल आतंकी हमलों में उनकी मदद कर रहे हैं। सुरक्षा सूत्रों ने हमारे सहयोगी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि ये स्थानीय आतंकवादी सालों पहले पीओजेके में घुसपैठ कर आए थे।

उन्होंने कहा, "हमारे पास खुफिया जानकारी है, जिससे पता चलता है कि ये आतंकवादी विदेशी आतंकवादियों के साथ घुसपैठ कर चुके हैं। भौगोलिक इलाके से परिचित होने की वजह से वे अब जंगलों में लक्ष्यों और सुरक्षित ठिकानों की पहचान करने में उनकी मदद कर रहे हैं। साथ ही, स्लीपर सेल द्वारा स्थानीय समर्थन को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। नाम न बताने की शर्त पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, "हमें जानकारी मिली है कि ये स्थानीय आतंकवादी करीब तीन महीने पहले अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए पाकिस्तानी आतंकवादियों के साथ घुसपैठ कर चुके हैं।'' एक सप्ताह पहले, पुलिस महानिदेशक आरआर स्वैन ने कहा था कि कुछ विदेशी आतंकवादी घुसपैठ करने में कामयाब हो गए हैं और सुरक्षा बलों ने उन्हें खत्म करने के लिए आतंकवाद विरोधी अभियान तेज कर दिया है।

इस मोबाइल ऐप और चाइनीज हैंडसेट की ले रहे मदद
खुफिया सूत्रों ने खुलासा किया है कि पाकिस्तानी आतंकवादी भौगोलिक इलाके की जानकारी, संवाद और अपने लक्ष्यों का पता लगाने के लिए अल्पाइन क्वेस्ट मोबाइल ऐप और चीनी अल्ट्रासेट हैंडसेट का भी सहारा ले रहे हैं। कठुआ में सोमवार को मछेड़ी इलाके के भदनोता गांव में हुए आतंकवादी हमले की जांच कर रही जांच एजेंसियों ने खुलासा किया है कि आतंकवादियों ने लक्ष्य का स्थान चुनने के लिए अल्पाइन क्वेस्ट ऐप का इस्तेमाल किया था। इस हमले में पांच जवान शहीद हो गए थे, जबकि पांच अन्य घायल हुए थे।

बिना नेटवर्क भी ऐप देती है सटीक जानकारी
सूत्रों ने आगे कहा, "हम जांच कर रहे हैं कि पिछले डेढ़ साल में जम्मू में हुए सभी आतंकी हमलों में इस ऐप का इस्तेमाल हुआ था या नहीं। अल्पाइन क्वेस्ट ऐप नदियों, नालों और पहाड़ियों की सटीक लोकेशन की पहचान करने में मदद करती है।" यह ऐप आतंकियों को घने जंगलों में नेविगेट करने और सुरक्षा बलों को चकमा देने में मदद करता है। यह नेटवर्क के बिना भी पहाड़ी इलाकों की सटीक जानकारी देती है। जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन के प्रॉक्सी कश्मीर टाइगर्स ने कठुआ हमले की जिम्मेदारी ली है। जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि जम्मू क्षेत्र में आतंकियों के दो अलग-अलग समूह सक्रिय थे। उन्होंने कहा, "दोनों समूह तीन से चार आतंकियों के छोटे-छोटे समूहों में बंट गए हैं और डोडा, कठुआ, उधमपुर और रियासी के ऊपरी इलाकों में फैल गए हैं।" 

14 मोबाइल ऐप्स पर लगाया था बैन
सूत्रों ने बताया कि पिछले साल मई में केंद्र ने 14 मोबाइल मैसेजिंग एप्लीकेशन पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिनका कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर में आतंकी समूहों द्वारा अपने समर्थकों और ओवर ग्राउंड वर्कर्स से बात करने और पाकिस्तान से निर्देश प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। प्रतिबंधित ऐप्स में क्राइपवाइजर, एनिग्मा, सेफस्विस, विक्रम, मीडियाफायर, ब्रायर, बीचैट, नंदबॉक्स, कॉनियन, आईएमओ, एलिमेंट, सेकंड लाइन, जांगी और थ्रीमा शामिल थे। वहीं, सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में ओपन-सोर्स मैसेजिंग एप्लीकेशन 'ब्रायर' पर रोक लगाने के केंद्र के आदेश को खारिज करने से इनकार कर दिया और कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को दरकिनार किया जा सकता है। ब्रायर एक ऐसी तकनीक पर काम करता है जिसमें कोई व्यक्ति इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना भी किसी दूसरे व्यक्ति को सीधे मैसेज भेज सकता है।