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कश्मीर राग अलाप रहे थे चीन और पाकिस्तान, भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब; CPEC पर भी घेरा

भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी अन्य देश को इस पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने संयुक्त बयान में शामिल चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) पर भी कड़ी टिप्पणी की।

कश्मीर राग अलाप रहे थे चीन और पाकिस्तान, भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब; CPEC पर भी घेरा
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 13 Jun 2024 06:24 PM
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चीन और पाकिस्तान ने एक बार फिर से भारत के जम्मू और कश्मीर को लेकर बयान जारी किया है। हालांकि हर बार की तरह इस बार भी भारत ने दोनों देशों को खूब खरी-खरी सुनाई। भारत ने चीन और पाकिस्तान के ताजा संयुक्त बयान में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के ‘‘अनुचित’’ संदर्भों को बृहस्पतिवार को दृढ़ता से खारिज कर दिया। भारत ने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख "भारत के अभिन्न अंग रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे"। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग के बीच वार्ता के बाद गत सात जून को बीजिंग में संयुक्त बयान जारी किया गया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘‘हमने सात जून को चीन और पाकिस्तान के बीच संयुक्त बयान में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के अनुचित संदर्भों को देखा है। हम ऐसे संदर्भों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं।" उन्होंने कहा, ‘‘इस मुद्दे पर हमारी स्थिति सुसंगत है और संबंधित पक्षों को अच्छी तरह से पता है। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे।"

जायसवाल संयुक्त बयान पर मीडिया के एक सवाल का जवाब दे रहे थे। जायसवाल ने कहा, ‘‘किसी अन्य देश को इस पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।’’ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने संयुक्त बयान में शामिल चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) पर भी कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, ‘‘इसी संयुक्त बयान में तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के तहत गतिविधियों और परियोजनाओं का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें से कुछ भारत के संप्रभु क्षेत्र में हैं, जो पाकिस्तान द्वारा जबरन और अवैध कब्जे में हैं।’’ जायसवाल ने कहा, ‘‘हम भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर आघात करने वाले इन क्षेत्रों पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे को मजबूत करने या वैध बनाने के लिए अन्य देशों द्वारा किए गए किसी भी कदम का दृढ़ता से विरोध करते हैं और इसे अस्वीकार भी करते हैं।’’