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हिंदी न्यूज़ देशघाटी में आतंकी संगठनों में स्थानीय युवाओं की भर्ती बनी भारतीय सेना के लिए चुनौती

घाटी में आतंकी संगठनों में स्थानीय युवाओं की भर्ती बनी भारतीय सेना के लिए चुनौती

विशेष संवाददाता,नई दिल्लीShankar Pandit
Wed, 27 Oct 2021 05:52 AM
घाटी में आतंकी संगठनों में स्थानीय युवाओं की भर्ती बनी भारतीय सेना के लिए चुनौती

जम्मू-कश्मीर में स्थानीय युवाओं की आतंकी संगठनों में भर्ती सरकार के लिए लगातार चुनौती बनी हुई है। एक तरफ जहां सुरक्षा बल लगातार आतंकियों का सफाया कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमात जैसे संगठन कट‌्टरपंथ का प्रसार करके लगातार युवाओं को आतंकी संगठन में भर्ती कर रहे हैं। इस साल भर्ती हुए आतंकियों में करीब 60 फीसदी का सफाया सुरक्षा बलों ने कर दिया है। लेकिन बचे हुए आतंकी सिरदर्द बने हुए हैं।

इस साल अगस्त तक 97 स्थानीय युवा आतंकी संगठनों में भर्ती हुए। इनमें से 56 को सुरक्षा बलों द्वारा मौत के घाट उतार दिया गया। जनवरी में सात, फरवरी में 11, मार्च में 11, अप्रैल में 12, मई में 18, जून में 17, जुलाई सात और अगस्त में 14 स्थानीय युवा आतंकी बने थे। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कट्टरपंथ की वजह से लगातार आतंकी भर्ती जारी है।

सूत्रों का कहना है कि घाटी में दोतरफा चुनौती से सुरक्षा बल जूझ रहे हैं। एक तरफ सीमा पार से घुसपैठ जारी है। पीओके में नए आतंकी कैम्प बनाए गए हैं और इनके जरिए घाटी में अस्थिरता की साजिश रची जा रही है। वहीं घाटी के अंदर स्थानीय भर्ती जारी रहने से आतंकियों के सफाए के बाद भी आतंकी संगठनों के पास एक स्थिर संख्या बनी रहती है।

सूत्रों का कहना है कि घाटी में विकास और राजनीतिक प्रक्रिया के जरिए युवाओं को जोड़ने की मुहिम तब तक रंग नही ला सकती, जब तक कट्टरता पर अंकुश लगाने की रणनीति कारगर न हो। बता दें कि घाटी में लगातार स्थानीय युवक आतंकवाद की ओर बढ़ रहे हैं और यही वजह है कि गैर-कश्मीरियों के खिलाफ हिंसा के मामले भी बढ़े हैं। 

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