jain Muni Tarun Sagar passed away know about his life - जैन मुनि तरुण सागर : वैरागी बनने के लिए 13 की उम्र में छोड़ दिया था घर, जलेबी खाते हुए आया विचार DA Image

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जैन मुनि तरुण सागर : वैरागी बनने के लिए 13 की उम्र में छोड़ दिया था घर, जलेबी खाते हुए आया विचार

जैन मुनि

जैन मुनि तरुण सागर ने मात्र 13 साल की उम्र में वैरागी बनने के लिए घर छोड़ दिया था। उन्होंने छत्तीसगढ़ में 1981 में दीक्षा ली थी। इस दौरान उन्होंने क्षुल्लक को अपना लिया। क्षुल्लक शब्द जैन धर्म में दो वस्त्र धारण करनेवाले व्रतियों के लिए प्रयोग किया जाता है। इसके बाद पवन कुमार जैन से उनका नाम तरुण सागर पड़ गया। 

20 की उम्र में दिगंबर मुनि बने
जैन मुनि तरुण सागर 20 साल की उम्र में दिगंबर मुनि बने। उन्होंने आचार्य पुष्पदंत सागर से राजस्थान के बागीदौरा में दीक्षा ली। जहां क्षुल्लक दो वस्त्रों को पहनते हैं, वहीं दिगंबर साधु कोई वस्त्र धारण नहीं करते और कठोर तप करते हुए जीवन व्यतीत करते हैं।

जलेबी खाते-खाते विचार आया 
जैन मुनि तरुण सागर को छठी कक्षा में पढ़ाई के दौरान जलेबी खाते समय वैराग्य का विचार आया था। उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया था, मुझे जलेबियां खाना बहुत पसंद है। इस दौरान उन्होंने बताया कि मैं एक दिन स्कूल से घर जा रहा था। इसी दौरान एक दुकान पर रुककर जलेबी खाने लगा। उन्होंने बताया कि पास में ही आचार्य पुष्पधनसागरजी महराज का प्रवचन चल रहा था। प्रवचन के दौरान ही पुष्पधनसागरजी महराज ने कहा, तुम भी भगवान बन सकते हो। उन्होंने बताया कि ये शब्द जब मेरे कानों में पड़े तो जलेबी का रस जाता रहा और भगवान बनने का रस आ गया। 
 
महावीर वाणी
इसके बाद एक टीवी कार्यक्रम में ‘महावीर वाणी’ नामक कार्यक्रम शुरू किया गया। इसके बाद जैन मुनि तरुण सागर की गिनती एक बड़ी शख्सियत में होने लगी। 
 
मध्य प्रदेश और हरियाणा विधानसभा को संबोधित किया
जहां एकतरफ जैन मुनि राजनीतिज्ञों से जुड़ने से बचते हैं वहीं तरुण सागर अक्सर अतिथि के रूप में राजनेताओं से मिलते रहे थे। उन्होंने 2010 में मध्य प्रदेश विधान सभा और 26 अगस्त 2016 में हरियाणा विधानसभा को संबोधित किया था। 

फर्जी बाबाओं की जांच करने को कहा था
पिछले साल उन्होंने देश में फर्जी बाबाओं की जांच करने और उन्हें सजा दिलवाने की बात भी कही थी। तरुण सागर ने कहा था कि देशभर में लगभग 1400 फर्जी बाबा हैं जिनकी संपत्ति की जांच होनी चाहिए। 

संघ की बेल्ट बदली
तरुण सागर को वर्ष 2011 में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने विजयदशमी के कार्यक्रम में बुलाया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि संघ जिस चमड़े की बेल्ट का इस्तेमाल करते हैं वह अहिंसा के विपरीत है। इसके बाद आरएसएस ने अपनी ड्रेस से चमड़े की बेल्ट की जगह कैनवस की बेल्ट इस्तेमाल करनी शुरू कर दी। 

कड़वे प्रवचन देने के लिए जाने जाते थे जैन मुनि तरुण सागर

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