जेल डॉक्टर पर बदसलूकी और इलाज में लापरवाही का आरोप, बंदी पहुंचा कोर्ट
जलालाबाद, एक बंदी ने जेल में चिकित्सक पर लापरवाही और अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाया। यह मामला तब बढ़ा जब बंदी ने न्यायालय की शरण ली। बंदी मोहम्मद आदिल ने गंभीर बिमारी की स्थिति में उचित उपचार न मिलने की शिकायत की। जेल प्रशासन पर दवाओं के वितरण में अनियमितताओं का भी आरोप लगाया गया है।

जलालाबाद, संवाददाता। जिला कारागार अनौगी में बंदियों के स्वास्थ्य और उनके साथ होने वाले व्यवहार को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। जेल में निरुद्ध एक बंदी द्वारा जेल अस्पताल के चिकित्सक पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने और अपमानजनक व्यवहार करने का सनसनीखेज आरोप लगाया गया है। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब पीड़ित बंदी ने जेल प्रशासन पर भरोसा न जताते हुए सीधे न्यायालय की शरण ली और लिखित शिकायत दर्ज कराकर निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई। सौरिख के राजापुर निवासी बंदी मोहम्मद आदिल पिछले कई दिनों से गंभीर रूप से जुकाम और खांसी से पीड़ित है। रात में लगातार उठने वाले खांसी के दौरों के कारण बैरक में बंद अन्य कैदियों की नींद भी हराम हो रही थी। तीन दिन पूर्व, आदिल की बिगड़ती स्थिति को देखकर साथी बंदी उसे उपचार के लिए जेल अस्पताल ले गए।
आरोप और आपत्ति
आरोप है कि वहां तैनात चिकित्सक ने मरीज की सुध लेना भी मुनासिब नहीं समझा और बिना किसी समुचित शारीरिक जांच के, केवल दवा थमाकर उन्हें वापस भेजने का प्रयास किया। जब साथी बंदियों ने डॉक्टर से मरीज की स्थिति को देखते हुए गहन जांच करने का मानवीय अनुरोध किया, तो चिकित्सक आगबबूला हो गए। शिकायत में आरोप है कि चिकित्सक ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए बंदियों से कहा कि ''डॉक्टर वही हैं'' और चुपचाप दवा लेकर चले जाएं। इस दौरान चिकित्सक ने न केवल मर्यादा की सीमाएं लांघीं, बल्कि बंदियों के खिलाफ अत्यंत अपमानजनक और भेदभावपूर्ण भाषा का भी प्रयोग किया, जिससे अस्पताल परिसर में तीखी नोकझोंक हुई। बंदी ने अपनी शिकायत में जेल के भीतर की अन्य कड़वी सच्चाइयों को भी उजागर किया है। आरोप है कि जेल अस्पताल में गंभीर बीमारियों को भी सामान्य बताकर टाल दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, बीमार कैदियों के लिए आने वाले पौष्टिक आहार जैसे दूध और अंडों के वितरण में लंबे समय से भारी अनियमितताएं चल रही हैं। इस न्यायिक शिकायत के बाद अब कारागार की आंतरिक व्यवस्थाओं और बंदियों के मानवाधिकारों को लेकर कानूनी व प्रशासनिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।
व्यवस्थाओं में सुधार नहीं, शिकायतों पर बनाया जाता है दबाव
जिला कारागार की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर कैदियों में असंतोष नया नहीं है। बंदियों का आरोप है कि मासिक निरीक्षण के समय उनकी समस्याओं को दबाने के लिए प्रशासन द्वारा उन पर भारी दबाव बनाया जाता है। अधिकारियों के दौरे के समय जेल की एक कृत्रिम और चमचमाती तस्वीर पेश कर उन्हें संतुष्ट कर दिया जाता है। कुछ समय पूर्व एक डिप्टी जेलर पर भी बंदी से मारपीट का आरोप लगा था, जिसे रफा-दफा कर दिया गया। बार-बार अदालती हस्तक्षेप के बावजूद जेल प्रशासन का ढर्रा जस का तस बना हुआ है।
बढ़ता आक्रोश बिगाड़ सकता है जेल का माहौल
जेल चिकित्सक के संवेदनहीन और अड़ियल रवैये को लेकर सामान्य कैदियों के बीच भारी आक्रोश पनप रहा है। बंदियों का कहना है कि बीमारी की हालत में भी उनकी बात को गंभीरता से नहीं सुना जाता, जिससे जेल के भीतर घोर असुरक्षा और नाराजगी का माहौल है। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, यदि प्रशासन ने इस सुलगते हुए विवाद को समय रहते नहीं सुलझाया, तो कैदियों का यह असंतोष किसी बड़े हंगामे या जेल अशांति का रूप ले सकता है, जिससे कारागार की सुरक्षा संकट में पड़ सकती है।
वहीं जेलर रविंद्र नाथ ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। हालांकि अभी तक शिकायत की प्रति नहीं पहुंची है। शिकायत पत्र प्राप्त होते ही पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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