स्नान ज्येष्ठ पूर्णिमा पर आज जगन्नाथ करेंगे 108 घड़ों से स्नान
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ का देव स्नान पूर्णिमा महोत्सव मनाया जाएगा। इस दिन भगवान को 108 घड़ों से स्नान कराया जाएगा। स्नान के बाद भगवान 15 दिनों तक एकांतवास रहेंगे और अंत में रथ यात्रा निकाली जाएगी। यह महोत्सव धनसार स्थित जगन्नाथ मंदिर में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर सोमवार को भगवान जगन्नाथ का पावन देव स्नान पूर्णिमा महोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का 108 घड़ों के पवित्र एवं शीतल जल से विशेष महास्नान कराया जाएगा। इसी अनुष्ठान के साथ वार्षिक रथयात्रा महोत्सव का शुभारंभ हो जाएगा। इसको लेकर धनसार स्थित जगन्नाथ मंदिर में विशेष तैयारी की गई है। भगवान को वेदी पर बैठाकर 108 कलश पवित्र, सुगंधित और औषधीय जल से स्नान कराया जाएगा। इस दिव्य स्नान के बाद भगवान बीमार पड़ जाएंगे। इसके बाद परंपरा के अनुसार भगवान 15 दिनों तक एकांतवास में रखा जाएगा।
16 जुलाई गुरुवार को शहर में भव्य रथ यात्रा निकलेगी। धनसार स्थित मंदिर में पुरी धाम की परंपराओं और विधि-विधान का पालन किया जाता है। स्नान पूर्णिमा से रथ यात्रा तक का सफर भगवान जगन्नाथ की लीलाओं का एक अत्यंत पवित्र और रहस्यमयी चक्र है, जो ज्येष्ठ पूर्णिमा से शुरू होकर आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तक चलता है। इसमें स्नान, एकांतवास और फिर भव्य नगर भ्रमण यानी रथ यात्रा की परंपरा शामिल है। यह सफर ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा से शुरू होता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का स्नान होता है। 15 दिनों के एकांतवास में उनकी औषधीय सेवा होगी। एकांतवास के अंतिम दिन भगवान का नेत्र उत्सव होगा। आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा निकाली जाएगी।


