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यासीन मलिक को सजा दिलाने में जैक, जॉन की अहम भूमिका, जानिए इनसाइड स्टोरी

यासीन मलिक को आजीवन कारावास की सजा दिलवाने में एनआईए के जैक और जॉन अहम गवाह थे, जिन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जानिए कैसे...

यासीन मलिक को सजा दिलाने में जैक, जॉन की अहम भूमिका, जानिए इनसाइड स्टोरी
Gaurav Kalaएजेंसी,नई दिल्लीThu, 26 May 2022 09:38 PM

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'जैक', 'जॉन' और 'अल्फा' एनआईए के उन खास गवाहों में से कुछ नाम हैं, जिन्होंने प्रतिबंधित जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक को आजीवन कारावास सजा दिलवाने में अहम भूमिका निभाई। ये नाम टेरर फंडिंग मामले में महत्वपूर्ण संरक्षित गवाहों को उनकी सुरक्षा के लिए पहचान छिपाते हुए दिए गए थे। 

टेरर फंडिंग के मामले में एनआईए ने 70 स्थानों पर छापे के दौरान लगभग 600 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए थे। दिल्ली की अदालत ने बुधवार को यासीन मलिक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। घटनाक्रम से अवगत अधिकारियों ने बताया कि लगभग चार दर्जन संरक्षित गवाह थे, लेकिन कोड नाम केवल कुछ चुनिंदा लोगों को दिए गए थे, जो एक पुख्ता मामला बनाने में मदद कर सकते थे। मामले की जांच एजीएमयूटी कैडर के 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी महानिरीक्षक अनिल शुक्ला के नेतृत्व में एनआईए की एक टीम ने की थी, जिसके तत्कालीन निदेशक शरद कुमार संगठन का नेतृत्व कर रहे थे।

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टीम की कड़ी मेहनत
कुमार ने बताया कि फैसला निश्चित रूप से मामले की जांच करने वाली टीम की कड़ी मेहनत का इनाम है। मैं सजा से बहुत संतुष्ट हूं। उसने (यासीन) मौत की सजा से बचने के लिए अपराध स्वीकार कर चतुराई दिखाई, लेकिन फिर भी, उसकी सजा को देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने का सपना देखने वालों के लिए एक निवारक के रूप में काम करना चाहिए। 

अधिकारियों ने कहा कि अब अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में तैनात शुक्ला एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखे जाते हैं, जिन्होंने अलगाववादियों को धन की आपूर्ति रोककर कश्मीर घाटी में पथराव की घटनाओं को समाप्त किया। उन्होंने मामले में संरक्षित गवाह रखने की नीति का पालन करने का फैसला किया था ताकि कोई कोर-कसर न रह जाए।

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न्यायाधीश का जॉन, गोल्फ पर भरोसा
66 वर्षीय मलिक के खिलाफ आरोप तय करते समय, विशेष एनआईए न्यायाधीश ने संरक्षित गवाहों 'जैक', 'जॉन' और 'गोल्फ' समेत अन्य पर भरोसा किया था, जिन्होंने प्रदर्शन और बंद के लिए अन्य हुर्रियत नेताओं के साथ सैयद अली शाह गिलानी और मलिक की नवंबर, 2016 में हुई बैठकों के बारे में उल्लेख किया था। एक अन्य संरक्षित गवाह ने कहा था कि यह गिलानी और मलिक थे, जो उसे अखबारों में प्रचार के लिए विरोध कैलेंडर भेजते थे।

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