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इंफोसिस अधिकारी से साइबर ठगी, 3.7 करोड़ रुपये ऐंठे; 'फर्जी' ने वीडियो कॉल पर दिखाया पुलिस स्टेशन और...

ठगी के शिकार एग्जीक्यूटिव ऑफिसर ने पुलिस को बताया, 'सबसे पहले 21 नवंबर को एक व्यक्ति ने मुझे कॉल किया। उसने बताया कि मेरे खिलाफ मुंबई के वकोला पुलिस स्टेशन में मेरे खिलाफ केस दर्ज हुआ है।'

इंफोसिस अधिकारी से साइबर ठगी, 3.7 करोड़ रुपये ऐंठे; 'फर्जी' ने वीडियो कॉल पर दिखाया पुलिस स्टेशन और...
Niteesh Kumarलाइव हिन्दुस्तान,बेंगलुरुWed, 29 Nov 2023 04:34 PM
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आईटी कंपनी इंफोसिस के सीनियर एग्जीक्यूटिव के साथ 3.7 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर-क्रिमिनल्स ने उनसे TRAI, CBI और मुंबई पुलिस के अधिकारी के तौर पर बातचीत की थी। ठगों ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग समेत कई सारे मामलों में उनकी मिलीभगत को लेकर गिरफ्तार करने की धमकी दी। एग्जीक्यूटिव ऑफिसर ने पुलिस को बताया, 'सबसे पहले 21 नवंबर को एक व्यक्ति ने मुझे कॉल किया। उसने बताया कि मुंबई के वकोला पुलिस स्टेशन में मेरे खिलाफ केस दर्ज हुआ है। साथ ही मेरे आधार कार्ड डिटेल्स को लेकर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज हुआ है।'

ठगी के शिकार शख्स ने बताया कि उन्हें अगले 2 दिनों तक लगातार फोन कॉल्स किए गए। इस दौरान उन्हें अपने पर्सनल अकाउंट से अलग-अलग बैंक खातों में 3.7 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के लिए कहा गया। शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस ने IT एक्ट और IPC की धारा 419 व 420 के तहत केस दर्ज किया है। इस मामले के बारे में जानकारी देते हुए सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि 3 करोड़ रुपये से अधिक की राशि गायब हुई है, इसे देखते हुए यह केस CID को सौंपा जाएगा। उन्होंने बताया कि अब उन बैंक खातों को फ्रीज किया जा रहा है जिनमें पैसे भेजे गए थे। 

वीडियो कॉल के जरिए दिखाया फेक पुलिस स्टेशन
रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस अधिकारी ने कहा कि फोन करने वाले ने खुद को TRAI ऑफिसर बताया। इस मामले में शिकायतकर्ता के नाम पर जो सिम कार्ड रजिस्टर्ड थी उसका गैरकानूनी विज्ञापन पोस्ट करने में यूज होता था। जालसाजी के दौरान कॉल ऐसे शख्स को ट्रांसफर की गई जिसने खुद को मुंबई पुलिस का सीनियर अधिकारी बताया। उसने एग्जीक्यूटिव से कहा कि जांच के सिलसिले में मुंबई और दिल्ली के सीबीआई ऑफिसर्स उनके घर का दौरा करेंगे। वे लगातार यह धमकी देते रहे कि ऐसा नहीं हुआ तो उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इस दौरान वीडियो कॉल पर भी बातचीत हुई थी। एग्जीक्यूटिव ऑफिसर ने पुलिस स्टेशन, खाकी पहने पुलिसकर्मी और शिकायत की कॉपी भी देखी। मगर, उन्हें इस बात का एहसास नहीं हुआ कि ये सब फर्जी है।

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