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ISRO और एलन मस्क पहली बार आएंगे साथ, अंतरिक्ष में रचेंगे इतिहास; जानिए नया मिशन

इसरो साल 2024 की आखिरी तिमाही में अंतरिक्ष में नया मिशन भेजने जा रहा है। इसके लिए इसरो ने एलन मस्क की कंपनी स्पेस X की मदद ली है। यह पहली बार है, जब इसरो और मस्क साथ आए हैं।

ISRO और एलन मस्क पहली बार आएंगे साथ, अंतरिक्ष में रचेंगे इतिहास; जानिए नया मिशन
Gaurav Kalaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 03 Jan 2024 06:10 PM
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) साल 2023 में इतिहास रचने के बाद नए साल से नए जोश और मिशन के साथ आगे बढ़ रहा है। 2024 में इसरो एक बार फिर इतिहास रचने जा रहा है। इस बार इसरो ने अंतरिक्ष में इतिहास रचने के लिए अंतरिक्ष की नंबर वन कंपनी SpaceX से हाथ मिलाया है। इसरो साल 2024 की तिमाही में अपने संचार सैटेलाइट GSAT-20 को अंतरिक्ष कंपनी स्पेस-X की मदद से लॉन्च करने वाला है। इसकी घोषणा बुधवार को इसरो के कमर्शियल पार्टनर NSIL ने की है। जानिए, इस मिशन की खासियत क्या है?

ऐसा पहली बार हो रहा है जब इसरो अपने किसी मिशन को लॉन्च करने के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष कंपनी स्पेस X के फाक्कन-9 हेवी लिफ्ट लॉन्चर का प्रयोग करेगा। स्पेस X उद्योगपति एलन मस्क की कंपनी है, जिसकी 2002 में स्थापना की गई थी। इसरो का बहुत प्रतिक्षित मिशन GSAT-20 को फाल्कन 9 रॉकेट की मदद से अमेरिका के फ्लोरिडा से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।

इसरो मिशन में क्यों ले रहा मस्क की मदद
यहां यह जानना जरूरी है कि भारत के अपने रॉकेटों में 4 टन वर्ग से ऊपर भूस्थैतिक कक्षा में बहुत भारी सैटेलाइट्स को लॉन्च करने की क्षमता नहीं है। इसलिए इसरो इसके लिए एलन मस्क की कंपनी स्पेस X की मदद ले रहा है। इससे पहले भारत इसके लिए फ्रांस पर निर्भर था। 

बेहद महत्वपूर्ण है मस्क से करार
ISRO के अध्यक्ष एस सोमनाथ का कहना है कि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी को स्पेस-X के पास जाना पड़ा, क्योंकि समय पर कोई अन्य रॉकेट उपलब्ध नहीं था। स्पेस-X और ISRO के साथ यह करार महत्वपूर्ण बदलाव है, क्योंकि भारत भारी सैटेलाइट को लॉन्च करने के लिए अभी तक फ्रांस के नेतृत्व वाले एरियनस्पेस कंसोर्टियम पर बहुत अधिक निर्भर था। GSAT 20 सैटेलाइट का नाम GSAT-N2 होगा और यह अनिवार्य रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंच प्रदान करेगा।

मिशन क्या है
इसरो के कमर्शियल पार्टनर न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) ने बताया कि इसरो GSAT-20 सैटेलाइट का निर्माण कर रही है। इस सैटेलाइट को विशेष रूप से दूरदराज के इलाकों में संचार व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। इस सैटेलाइट का वजन 4700 किलोग्राम है जो करीब 48 Gpbs की क्षमता प्रदान करता है। यह सैटेलाइट अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, जम्मू और कश्मीर और लक्षद्वीप सहित भारतीय क्षेत्रों में संचार सेवाएं प्रदान करेगा। इसे 2024 की आखिरी तिमाही में लॉन्च किया जा सकता है।

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