ISRO Mission Chandrayaan 2 Dream of living Moon Become True - चंद्रयान-2 : चांद पर बसने का सपना होगा साकार, खनिज संपदा की खोज और पर्यटन को भी बढ़ावा DA Image

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चंद्रयान-2 : चांद पर बसने का सपना होगा साकार, खनिज संपदा की खोज और पर्यटन को भी बढ़ावा

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चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण के साथ ही एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या कभी चंद्रमा पर इंसान के लिए बसना संभव हो पाएगा? क्या वहां कभी लोग सैर के लिए जा सकेंगे? इसरो के पूर्व चैयरमैन एवं चंद्रयान कार्यक्रम से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक के. किरण कुमार कहते हैं कि यह एक एक दिन जरूर संभव होगा। लेकिन अभी यह नहीं कह सकते हैं कि इसमें कितना समय लगेगा। लेकिन इतना तय है कि एक दिन इंसान वहां बसने लगेगा।

पिछले पांच दशकों में चंद्रमा पर सैकड़ों अभियान जा चुके हैं। लेकिन कुछ नतीजा नहीं निकलने पर अमेरिका एवं रूस जैसे बड़े देशों ने चंद्रमा से जुड़े कार्यक्रम बंद कर दिए हैं। लेकिन भारत, चीन समेत कई देश लगातार इस दिशा में कार्य कर रहे हैं। वे चांद के नए हिस्सों में जा रहे हैं। इसलिए चंद्रमा के अनछुए पहलुओं से पर्दा उठाने की उम्मीदें अभी भी कायम हैं। दूसरे, चंद्रमा पर जीवन की संभावनाओं की खोज अभी खत्म नहीं हुई है।

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इसरो चेयरमैन के. शिवन कहते हैं कि भविष्य में धरती पर जब खनिज संपदा खत्म हो जाएगी तब हम इस स्थिति में पहुंच चुके होंगे की चांद से लाकर उनकी पूर्ति कर सकें। इसी प्रकार हमारे मौजूदा कार्यक्रम भविष्य में अंतरिक्ष पर्यटन के लिए भी नए रास्ते खोलेंगे। अंतरिक्ष पर्यटन अगले दस सालों में वास्तविकता में बदल जाएगा। लेकिन चांद पर सैलानी कब से जाना शुरू होंगे, यह अभी नहीं बता सकते।

पूर्व चेयरमैन किरण कुमार के अनुसार यदि अगले कुछ दशकों में चांद पर इंसान की बसने की अवसर पैदा होते हैं तो इससे अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नई खोजों के मौके मिलेंगे। तब वैज्ञानिक चांद को अपना पड़ाव बना लेंगे और फिर वहां से दूसरे ग्रहों के बारे में शोध करेंगे या अभियान चलाएंगे। तब धरती की बजाय चांद से ही उपग्रह दूसरे ग्रहों के लिए भेजना संभव हो सकता है।

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क्यों अहम है चंद्रयान-2
वैज्ञानिक क्षमता :  इस अभियान के जरिये भारत अपनी वैज्ञानिक क्षमता का प्रदर्शन करेगा। वह चांद के ऊपर उपग्रह भेजेगा। उसमें से लैंडर को चांद की सतह पर उतारेगा। और फिर उसमें से रोवर बाहर निकलकर 15 दिनों तक चांद की सतह के आंकड़े एकत्र कर इसरो को भेजेगा। इस पूरे अभियान की सफलता इसरो का अगले कदम तय करेगी जिसमें इंसान को चांद पर भेजना शामिल हो सकता है।

नए शोध की संभावना : आज शोध उपकरण और आंकड़ों के विश्लेषण करने की क्षमता बढ़ गई है, इसलिए इस प्रकार के शोध चांद पर पहले हो चुकने के बावजूद नई संभावनाएं बनी हुई हैं।

दक्षिणी ध्रुव पर पहली बार : भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर उतार रहा है, इस ध्रुव पर अभी तक कोई अभियान नहीं पहुंचा है, इसलिए नए तथ्य सामने आने की संभावनाएं ज्यादा हैं।

खनिज की तलाश :  चांद पर खनिजों की मौजूदगी पता लगाने में यह मिशन अहम होगा। जैसे चांद पर हीलियम होने की संभावना है। यदि ऐसी कोई खोज हो पाती है तो भविष्य में जब भी खनिज संपदाओं का बंटवारा होगा, भारत की उस पर मजबूत दावेदारी होगी।

क्रायोजनिक इंजन की परीक्षा : इस मिशन में इस्तेमाल हो रहा जीएसएलवी और उसमें लगे क्रायोजनिक इंजन की भी यह परीक्षा होगी। यह तकनीक उपग्रह प्रक्षेपण के साथ-साथ अन्तरद्वपीय मिसाइलों के निर्माण में भी प्रयुक्त होती है। इसलिए चंद्रयान-2 की सफलता रणनीतिक नजरिये से भी अहम है। 

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