isro journey from aryabhatt to sending 100th satellite - अंतरिक्ष में 100वां उपग्रह भेजने के लिए इसरो ने तय किया ये शानदार सफर 1 DA Image
15 नबम्बर, 2019|10:09|IST

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अंतरिक्ष में 100वां उपग्रह भेजने के लिए इसरो ने तय किया ये शानदार सफर

इसरो आज श्रीहरिकोटा से अपने 100वें उपग्रह का प्रक्षेपण करेगा
इसरो आज श्रीहरिकोटा से अपने 100वें उपग्रह का प्रक्षेपण करेगा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) आज श्रीहरिकोटा से अपने 100वें उपग्रह का प्रक्षेपण करेगा और इसके साथ ही अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर पहुंच जाएगा।। यह प्रक्षेपण इस साल का पहला प्रक्षेपण है। इस उपग्रह के साथ 30 अन्य उपग्रहों को भी अंतरिक्ष में पहुंचाया जाएगा। यह मिशन देश के अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।

इसमें भारत के तीन और छह अन्य देशों के 28 उपग्रह शामिल हैं। इसरो के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया, 'श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से शुक्रवार सुबह 9:28 बजे पीएसएलवी-सी40 रॉकेट छोड़े जाने के 24 घंटे पूर्व गुरुवार को उल्टी गिनती शुरू हो गई है।'

इतना होगा वजन
भारतीय उपग्रहों में से एक 100 किलोग्राम का माइक्रो सैटेलाइट और एक पांच किलोग्राम का नैनो सैटेलाइट शामिल है। बाकी 28 सैटेलाइट कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका के हैं। 31 उपग्रहों का कुल वजन 1323 किलोग्राम है।

ऐसा रहा इसरो का 100 उपग्रहों तक पहुंचने का सफर
1969 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना के बाद भारत ने अंतरिक्ष में छलांग लगाना शुरू किया और साल दर साल तमाम देशी और विदेशी सैटेलाइट को अंतरिक्ष में पहुंचाकर नई ऊंचाइयों को छूता गया। आइए जानते हैं इसरो के इतिहास के उन सैटेलाइट लॉन्च के बारे में जिन्होंने भारत को अंतरिक्ष के क्षेत्र में विकसित देशों के बराबर पहुंचा दिया।

आगे की स्लाइड में देखें इसरो का सफर

1975 से लेक 2000 तक
1975 से लेक 2000 तक

> 19 अप्रैल 1975- इस दिन भारत ने अपनी पहली सैटेलाइट 'आर्यभट्ट' को सफलता पूर्वक अंतरिक्ष में भेजा और दुनिया को दिखाया कि वो भी स्पेस तकनीक में किसी से पीछे नहीं रहने वाला।

> 7 जून 1979 - इस दिन भारत ने अपने पहले प्रोयोगिक उपग्रह भास्कर-1 का सफल प्रक्षेपण किया। ये धरती की निगरानी करने वाला उपग्रह था।

> 18 जुलाई 1980 - इसरो ने भारत के पहले स्वदेशी प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 से रोहिणी RS-1 सैटेलाइट को लॉन्च किया।

> 19 जून 1981 - इसरो ने पहली जियो स्टेशनरी (स्थायी) सैटेलाइट APPLE को सफलतापूर्व लॉन्च किया।

> 17 मार्च 1988 - इसरो ने भारत की पहली रिमोट सेन्सिंग तकनीक (यानि अंतरिक्ष से धरती की गतिविधि रिकॉर्ड करने वाली) वाली सैटेलाइट IRS-1A लॉन्च की।

> 10 जुलाई 1992 - स्वदेशी सैटेलाइट सिस्टम INSAT पर बने पहले उपग्रह INSAT-2A को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा गया।

> 23 जुलाई 1993 - इस दिन इनसेट सीरीज के दूसरे उपग्रह इनसेट 2बी का सफल प्रक्षेपण किया गया। यह इसरो की बड़ी उपलब्धि थी।

> 29 सितंबर 1997 - इसरो ने पहली बार पीएसएलवी यान को लॉन्च किया जिसमें IRS-1D सैटेलाइट भेजी गई।

> 22 मार्च 2000 - इनसेट 2 सीरीज की पहली सैटेलाइट इनसेट-3बी को लॉन्च किया गया। इसे व्यापार संचार, विकासात्क संचार और मोबाइल संचार जैसे कार्यों के लिए अंतरिक्ष में भेजा गया।

अगली स्लाइड में देखें 2000 से लेकर आज तक का सफर

2000 से लेकर आज तक
2000 से लेकर आज तक

> 12 सितंबर 2002 - अंतरिक्ष में जाने वाली देश की पहली महिला कल्पना चावला के नाम पर कल्पना 1 सैटेलाइट को भारत से लॉन्च किया गया।

> 20 सितंबर 2004- पहली पूरी तरह से शिक्षा पर आधारित सैटेलाइट जीसेट-3 का प्रक्षेपण किया गया।

> 22 दिसंबर 2005 - डायरेक्ट टू होम यानि डीटीएच केबल टीवी नेटवर्क के लिए इनसेट 4ए उपग्रह को अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया।

> 20 अप्रैल 2009 - भारत के सीमा क्षेत्रों से फैलने वाले आतंकवाद को रोकने के लिए रडार की तस्वीरें देने वाली RISAT-2 सैटेलाइट लॉन्च की गई। इसे पीएसएलवी सी-12 रॉकेट से भेजा गया था। 

> 12 जुलाई 2010- इस दिन इसरो की सबसे हल्की, एक किलो वजनी सैटेलाइट 'StudSat' को अंतरिक्ष में भेजा गया। ये सैटेलाइट कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के सात युवा इंजीनियरों ने मिलकर बनाई थी।

> 26 अप्रैल 2012 - इस दिन रीसेट-1 उपग्रह लॉन्च किया गया जो भारत का पहला रडार तस्वीरों की मदद से मौसम की जानकारी देने वाला उपग्रह है। 

> 1 जुलाई 2013 - इस दिन इसरो को एक और बड़ी सफलता मिली जब उसने भारत का नेविगेशन उपग्रह प्रक्षेपित किया। इससे भारत को अमेरिका के डीपीएस जैसा अपना जीपीएस सिस्टम मिल गया।

> 15 फरवरी 2017 - यह दिन इसरो और भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के लिए यादगार दिन है क्योंकि इस दिन इसरो ने विश्व रिकार्ड बनाया। श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी-3 के माध्यम से एक साथ 104 उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे गए। इससे पहले रूस ने 2014 में एक साथ 37 उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किए थे। 

> 5 मई 2017 - इसरो ने सार्क देशों की मदद से जीसेट-9 उपग्रह अंतरिक्ष में लॉन्च करके भारत की हिस्सेदारी में चार चांद लगा दिए।

> 29 जून 2017 - इसरो ने भारतीय जमीन से अब तक का सबसे भारी उपग्रह जीसेट-17 लॉन्च किया। इसका वजन 3477 किलो है।

> 12 जनवरी 2018 - इस दिन इसरो अपने इतिहास का 100वां उपग्रह अंतरिक्ष में भेजने जा रहा है। इस उपग्रह के साथ 30 अन्य उपग्रहों को भी अंतरिक्ष में पहुंचाया जाएगा।

आगे स्लाइड में देखें क्या है इसरो की ताकत

क्या है ISRO की ताकत
क्या है ISRO की ताकत

> स्वदेशी निर्माण - भारत की स्पेस संस्थान की सबसे बड़ी ताकत है स्वदेशी निर्माण। पहले उपग्रह आर्यभट्ट के लॉन्च होने के बाद से ही इसरो ने अपनी खुद की तकनीक बनाने पर सबसे ज्यादा काम किया है, जो अब भी जारी है। चाहे वो अपनी रॉकेट तकनीक बनना हो, खुद का क्रायोजैनिक इंजन बनाना हो या फिर चंद्रयान और मंगल मिशन यान हो। ये सभी काफी हद तक स्वदेशी निर्माण थे।

> किफायती तकनीक का इस्तेमाल- 15 फरवरी 2017 को पीएसएलवी - सी37 से  भेजे गए 104 उपग्रह में इसरो ने सिर्फ 15 मिलियन डॉलर (करीब 95 करोड़) रुपये खर्च किए। वहीं नासा की बात करें तो इसी काम के लिए उसे 60 मिलियन डॉलर (करीब 6 अरब रुपये) खर्च करने पड़ जाते। बता दें कि दुनिया की तमाम स्पेस एजेंसियों में से भारत सबसे किफायती दामों में उपग्रह अंतरिक्ष में भेजता है।

> विदेशी सैटेलाइट से बंपर कमाई- बता दें कि अलग-अलग देशों के उपग्रह को भारत से लॉन्च करके इसरो शानदार कमाई कर रहा है। साल 2017 में इसरो ने विदेशी उपग्रहों से करीब 300 करोड़ कमाए थे। वहीं साल 2015-16 में इसरो ने 429 करोड़ रुपये की कमाई की थी जो पहले वाले साल का दोगुना था।

आगे की स्लाइड में देखें ISRO के सामने हैं ये चुनौतियां

 

जहां इसरो तमाम ऊंचाइयां छू रहा है वहीं कुछ ऐसे भी पैमाने हैं जहां हमारी स्पेस एजेंसी कमजोर है।
जहां इसरो तमाम ऊंचाइयां छू रहा है वहीं कुछ ऐसे भी पैमाने हैं जहां हमारी स्पेस एजेंसी कमजोर है।

- भारत अब तक इसरो के लिए एक संपूर्ण पॉलिसी लाने में विफल रहा है। इसरो में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए पॉलीसी बन रही है लेकिन एक केंद्रीय पॉलिसी नहीं है।

- दूसरा ये कि इसरो में अब तक प्राइवेट निवेशकों के लिए मौके नहीं खोले गए हैं। इसके कारण इसरो काम तो कर रहा है लेकिन सरकार के निर्धारित बजट में ही। वहीं नासा के साथ Spcace X जैसे प्राइवेट पार्टनर के आने से नई तकनीक और बेहतर इंवेस्मेंट के रास्ते हमेशा खुले रहते हैं।

- तीसरा ये कि दुनिया की बाकी स्पेस एजेंसियां अब अतंरिक्ष को नए मुद्दों जैसे स्पेस कचरा, स्पेस हथियार, साइबर आर्म्स को लेकर बात कर रहे हैं वहीं भारत इन मामलों पर पॉलिसी बनाने में पीछे है

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