झारखंड की कोयला खदानों की सैटेलाइट से होगी निगरानी, इसरो से करार
ड्रोन के जरिए कोयला क्षेत्र का एरियल सर्वे आम है। कोल इंडिया और इसरो की नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) के बीच झारखंड के कोल खनन क्षेत्रों की निगरानी के लिए एमओयू हुआ है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उपग्रह डेटा का उपयोग कर खदानों की निगरानी की जाएगी।

ड्रोन के माध्यम से कोयला क्षेत्र का एरियल सर्वे आम है। अब इसरो के सेटेलाइट के माध्यम से झारखंड के कोयला खनन क्षेत्रों की निगरानी होगी। इसके लिए कोल इंडिया और इसरो की एजेंसी एनआरएससी (नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर) के बीच शुक्रवार को एमओयू किया गया। कोल इंडिया ने खनन कार्यों की निगरानी, मॉनिटरिंग और पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की एनआरएससी के साथ करार किया है। इस एमओयू के कई उद्देश्य हैं। मसलन उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उपग्रह डेटा का उपयोग करके एक भू-स्थानिक डैशबोर्ड विकसित करना। इसके जरिए खदानों की सटीक निगरानी, हरियाली की ट्रैकिंग और विशेष रूप से झरिया कोयला क्षेत्र में कोयले की आग व भू-धंसान का पता लगाया जा सकेगा। यह प्लेटफॉर्म उपग्रहों से प्राप्त डेटा का उपयोग करेगा。
निगरानी के प्रमुख बिंदु
निगरानी के प्रमुख बिंदियों पर विशेषज्ञ बताते हैं कि अवैध खनन पर रोक लगाने में भी इससे मदद मिलेगी। उपग्रहों द्वारा ली गई उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरों से किसी भी अनधिकृत और अवैध खनन की त्वरित पहचान की जा सकती है। हरित आवरण और पुनर्वास में मदद मिलेगी। खदान क्षेत्रों में हुए वनीकरण, भूमि सुधार और पुनर्वास कॉलोनियों के विकास की सटीक जानकारी मिलेगी। झरिया कोयला क्षेत्र में इस समझौते के तहत सेटेलाइट तस्वीरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके झरिया में भूमिगत आग और भू-धंसान का अध्ययन व मानचित्रण भी किया जा सकेगा। मालूम हो कि अग्नि प्रभावित क्षेत्र को लेकर पूर्व में भी बीसीसीएल की ओर से एनआरएससी से स्टडी करायी गई थी।
अवैध खनन रोकने के उपाय
अभी हाल में कोयले के अवैध खनन को रोकने के लिए गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में उच्चस्तरीय बैठक में अत्याधनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया था। अवैध खनन के खिलाफ धनबाद सहित झारखंड के अन्य कोयला क्षेत्रों में ताबड़तोड़ कार्रवाई भी शुरू हो गई है। इसके तुरंत बाद इसरो की एजेंसी के साथ सेटेलाइट से निगरानी संबंधी करार कई मायनों में महत्वपूर्ण है।
क्या है एनआरएससी
एनआरएससी का पूरा नाम राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर) है। यह इसरो का एक प्रमुख केंद्र है, जो हैदराबाद (तेलंगाना) में स्थित है। यह मुख्यरूप से अंतरिक्ष से पृथ्वी की निगरानी और आपदा प्रबंधन के लिए कार्य करता है। एनआरएससी के प्रमुख कार्यों में सेटेलाइट डेटा प्राप्त करना और उसका विश्लेषण करना है। यह केंद्र भारतीय और विदेशी उपग्रहों से प्राप्त पृथ्वी अवलोकन डेटा को एकत्र और संसाधित करता है। हैदराबाद में ही एनआरएससी का ग्राउंड स्टेशन भी हैं।


