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इजरायल-ईरान में बढ़ी जंग तो भारत पर होगा असर? दोनों देशों से है दोस्ती, व्यापार भी खूब

नेतन्याहू ने करीबी सहयोगी देशों की ओर से संयम बरतने की अपील को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका देश यह तय करेगा कि इस सप्ताह की शुरुआत में ईरान के बड़े हवाई हमले का जवाब कैसे दिया जाए।

इजरायल-ईरान में बढ़ी जंग तो भारत पर होगा असर? दोनों देशों से है दोस्ती, व्यापार भी खूब
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 18 Apr 2024 08:07 PM
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इस सप्ताह की शुरुआत में इजरायल पर ईरान के हमले से मध्य पूर्व और उससे परे दुनिया के बड़े हिस्से में तनाव फैल गया है। इस तनाव का असर इन दोनों देशों से इतर कई अन्य देशों पर भी पड़ सकता है। खासतौर से उन देशों पर जिनका ईरान-इजरायल के साथ व्यापारिक संबंध है। भारत भी ऐसे ही देशों में शामिल है। भारत के ईरान और इजरायल के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। यही वजह है कि भारत ने विवाद बढ़ने के बारे में "गंभीर चिंता" व्यक्त की है।

दोनों देशों में छिड़ी जंग

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार को करीबी सहयोगी देशों की ओर से संयम बरतने की अपील को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका देश यह तय करेगा कि इस सप्ताह की शुरुआत में ईरान के बड़े हवाई हमले का जवाब कैसे दिया जाए। इजरायल ने ईरान के अभूतपूर्व हमले का जवाब देने का संकल्प लिया लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि यह जवाब कब और कैसे दिया जाएगा। पिछले साल अक्टूबर में गाजा पट्टी पर शासन कर रहे हमास के लड़ाकों ने इजरायल पर हमला कर करीब 1200 लोगों की हत्या कर दी थी और कई लोगों को बंधक बना लिया था। इसके जवाब में इजराइल ने सैन्य अभियान शुरू किया जो अब भी जारी है और इसके और विकराल रूप लेने की आशंका पैदा हो गई है। ताजा विवाद से क्षेत्र के व्यापारी भी चिंतित हो सकते हैं और बाजार भयभीत हो सकता है। 

भारत और इजरायल का व्यापार-आंकड़ों से समझिए

आइए समझते हैं कि भारत पर इसका क्या असर पड़ सकता है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच साल में भारत-इजरायल व्यापार दोगुना हो गया है। भारत ने 1992 में इजरायल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए। तब से, दोनों देशों के बीच व्यापार काफी बढ़ रहा है, जो 1992 में लगभग 200 मिलियन डॉलर से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2022-23 में 10.7 बिलियन डॉलर हो गया है। पहले दोनों देशों के बीच व्यापार ज्यादातर हीरे से जुड़ा होता था। लेकिन अब यह बहुत विस्तारित हो चुका है।

पिछले चार वर्षों में तेज वृद्धि हुई है और व्यापार दोगुना हो गया। 2018-19 में 5.56 बिलियन डॉलर से 2022-23 में 10.7 बिलियन डॉलर हो गया। 2021-22 और 2022-23 के बीच, व्यापार में 36.90 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। 2022-23 में, इजरायल को भारत का निर्यात 8.45 बिलियन डॉलर का था, जबकि इजरायल से भारत का आयात 2.3 बिलियन डॉलर था। वित्त वर्ष 2023-24 में पहले 10 महीनों (अप्रैल-जनवरी) के दौरान द्विपक्षीय व्यापार 5.75 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान इजरायल भारत का 32 वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था। विदेश मंत्रालय (एमईए) के विदेशी संबंधों पर संक्षिप्त विवरण के अनुसार, भारत एशिया में इजरायल का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार और विश्व स्तर पर सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।

भारत और ईरान का व्यापार

इजरायल के विपरीत, पिछले पांच वर्षों में भारत-ईरान व्यापार में कमी आई है। 2022-23 में, ईरान भारत का 59वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था। दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 2.33 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था। वित्त वर्ष 2022-23 में बढ़ोतरी से पहले, ईरान के साथ भारत के व्यापार में हाल के वर्षों में कमी देखी गई थी। यह 2021-22 में 1.94 बिलियन डॉलर से 2022-23 में 2.33 बिलियन डॉलर हो गया है।

हालांकि, पिछले तीन वर्षों (2019-20, 2020-21 और 2021-22) में ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के मद्देनजर साल-दर-साल 9.10 प्रतिशत से लेकर 72 प्रतिशत तक की कमी आई है। ईरान के साथ व्यापार 2018-19 में 17 बिलियन डॉलर के उच्च स्तर से घटकर 2019-20 में 4.77 बिलियन डॉलर और 2020-21 में 2.11 बिलियन डॉलर हो गया।

वर्ष 2014-15 में भारत-ईरान व्यापार 13.13 अरब डॉलर था। जिसमें भारतीय आयात 8.95 अरब डॉलर (जिसमें 4 अरब डॉलर से अधिक का कच्चा तेल शामिल था।) वर्ष 2019-20 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण व्यापार में गिरावट आई। वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान द्विपक्षीय व्यापार भारत के कुल व्यापार का 0.20 प्रतिशत था। भारत मुख्य रूप से कृषि वस्तुओं और पशुधन उत्पादों का निर्यात करता था। इनमें मांस, स्किम्ड दूध, छाछ, घी, प्याज, लहसुन और डिब्बाबंद सब्जियां शामिल हैं। भारत ईरान से मिथाइल अल्कोहल, पेट्रोलियम बिटुमेन, द्रवीकृत ब्यूटेन, सेब, द्रवीकृत प्रोपेन, खजूर और बादाम का आयात करता है।

ताजा विवाद भारत पर क्या असर डालेगा? बढ़ेंगे पेट्रोल के दाम?

थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अनुसार, मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के परिणामस्वरूप भारत में पेट्रोल की कीमतों में कोई वृद्धि होने की संभावना नहीं है। हालांकि, लाल सागर में तनाव के कारण कुछ प्रभाव पड़ सकता है। क्योंकि यह यूरोप और एशिया को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग पर स्थित है। वैश्विक व्यापार का लगभग 12 प्रतिशत इस मार्ग पर निर्भर है। नवंबर 2023 से, यमन स्थित हूथी नामक आतंकवादियों ने इस क्षेत्र से गुजरने वाले कुछ जहाजों पर गोलीबारी की थी। उनका कहना है कि यह हमला गाजा पट्टी में इजरायल की सैन्य कार्रवाई के विरोध में है। वहीं इजरायल ने ईरान पर हौथियों का समर्थन करने का आरोप लगाया है।

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