झाझा की बेटी तनुश्री के तबादले पर रो पड़ा कश्मीर
झाझा की बेटी आइपीएस अधिकारी तनुश्री के जम्मू-कश्मीर में स्थानांतरण की खबर ने स्थानीय लोगों को भावुक कर दिया है। गृह मंत्रालय द्वारा 9 जुलाई को किए गए स्थानांतरण में उनका नाम शामिल है। वे 2017 से आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष करते हुए आमलोगों के बीच एक मजबूत पहचान बना चुकी हैं।

झाझा । शंकर किशोर सिंह जम्मू कश्मीर में आतंक के खिलाफ अभियान और आमलोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाने वाली झाझा की बेटी आइपीएस अधिकारी तनुश्री के दूसरे राज्य स्थानांतरण की खबर से वहां की आवाम भावुक है। गृह मंत्रालय द्वारा नौ जुलाई को किए गए आइपीएस अधिकारियों के स्थानांतरण में तनुश्री का भी नाम शामिल है। उनके स्थानांतरण की खबर सामने आने के बाद जम्मू-कश्मीर के लोग इंटरनेट मीडिया पर भावुक पोस्ट कर उन्हें याद कर रहे हैं। कोई उन्हें अपनी दीदी के रूप में याद कर रहा है तो कोई जांबाज और ईमानदार अधिकारी बताते हुए उनके साथ बिताए अनुभव साझा कर रहा है। तनुश्री ने वर्ष 2017 में आइपीएस अधिकारी के रूप में जम्मू-कश्मीर में सेवा शुरू की। उन्होंने सूफिया और पुलवामा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। आतंकवाद के खिलाफ अभियानों में स्त्रिरय भूमिका निभाने के साथ उन्होंने आमलोगों के बीच भी अपनी मजबूत पहचान बनाई। घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने और क्षेत्र में सुरक्षा का भरोसा कायम करने के उनके प्रयासों को स्थानीय लोगों ने सराहा。
पिता सेवानिवृत्त डीआइजी, बड़ी बहन सीआरपीएफ में कमांडेंट
तनुश्री जमुई जिले के झाझा नगर के पीपराडीह मुहल्ला निवासी सेवानिवृत्त डीआइजी संबोध कुमार की छोटी पुत्री हैं। उनकी बड़ी बहन मनुश्री सीआरपीएफ में कमांडेंट के पद पर कार्यरत हैं। सेवानिवृत्त डीआइजी की दोनों बेटियां अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी सेवा देकर परिवार और झाझा का नाम रोशन कर रही हैं।
करियर की शुरुआत
तनुश्री ने वर्ष 2014 में सीआरपीएफ में सहायक कमांडेंट के पद से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने आरपीएफ में कमांडेंट के रूप में भी सेवा दी। इसी दौरान उन्होंने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी। आयकर विभाग के अधिकारी पद पर भी उनका चयन हुआ था, लेकिन उन्होंने उस पद पर योगदान नहीं दिया। वर्ष 2016 में यूपीएससी की परीक्षा देने के बाद मई 2017 में उन्हें आइपीएस कैडर मिला।
आतंक के खिलाफ लड़ाई के साथ जीता लोगों का दिल
तनुश्री ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ अभियान में भूमिका निभाने के साथ आमलोगों के बीच भी विश्वास कायम किया। पुलवामा सहित अन्य क्षेत्रों में उन्होंने लोगों से सीधे संवाद कर उन्हें जागरूक किया। सुरक्षा व्यवस्था के साथ जनता के बीच उनकी स्त्रिरयता ने उन्हें स्थानीय लोगों के करीब ला दिया।
अब स्थानांतरण के बाद जम्मू-कश्मीर की आवाम द्वारा इंटरनेट मीडिया पर साझा किए जा रहे भावुक संदेश उनकी लोकप्रियता और लोगों के साथ बने संबंध को दर्शा रहे हैं। झाझा के लोगों का कहना है कि तनुश्री की उपलब्धियां पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात हैं।


