बर्खास्त एसपी के अधिवक्ता ने कोर्ट में लगाई माफी हाजिरी,वादी के दर्ज हुए बयान
नोट- महोबा व आसपास के ध्यानार्थ बर्खास्त एसपी के अधिवक्ता ने कोर्ट में लगाई माफी हाजिरी,वादी के दर्ज हुए बयान बर्खास्त एसपी के अधिवक्ता ने कोर्ट में ल

बांदा, संवाददाता। महोबा के क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत मामले में शुक्रवार को मुख्य आरोपी महोबा के बर्खास्त आईपीएस मणिलाल पाटीदार हाजिर नहीं हुए, उनके अधिवक्ता ने न्यायालय में माफी हाजिरी लगाई। तीन आरोपियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। न्यायालय में वादी के मुख्य प्रेक्षा बयान कराए जा रहे हैं। शुक्रवार को भी मृतक क्रशर व्यापारी के भाई रविकांत के जज के समक्ष बयान कराए गए। मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 अगस्त की तिथि निर्धारित की गई है।
मामले का विवरण
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत में महोबा के आरोपी बर्खास्त आईपीएस मणिलाल पाटीदार, कबरई के पूर्व थानाध्यक्ष देवेंद्र शुक्ला व मामले में सहयोगी रहे सूर्या केमिकल के डीलर सुरेश सोनी व अजय इंटरप्राइजेज के प्रोपाइटर ब्रह्मदत्त शुक्ला को बुधवार को हाजिर होना था। मणिलाल पाटीदार के अधिवक्ता ने न्यायालय में माफी हाजिरी का प्रार्थनापत्र दाखिल किया।
अन्य आरोपियों की स्थिति
जबकि अन्य आरोपियों में सुरेश सोनी व ब्रह्मदत्ता शुक्ल व कबरई के पूर्व थानाध्यक्ष देवेंद्र शुक्ला न्यायालय में हाजिर हुए और अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जबकि मामले में मुख्य वादी क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी के भाई रविकांत के बयान दर्ज कराए गए। अपर शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार तिवारी ने बताया कि वादी के मुख्य प्रेक्षा बयान लगे हैं। उनके लगातार बयान हो रहे हैं। अभी आगे की तारीख में उनके बयान दर्ज कराए जाएंगे। अब मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी।
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ये है चर्चित मामला
बर्खास्त एसपी का आरोप
बांदा। न्यायालय में विचाराधीन मामले में बर्खास्त एसपी मणिलाल पाटीदार पर क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी से प्रतिमाह छह लाख रुपये रिश्वत मांगने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप हैं। इंद्रकांत त्रिपाठी ने सात सितंबर 2020 को रिश्वत मांगने का वीडियो वायरल किया था, जिसके बाद आठ सितंबर 2020 को उन्हें गोली लगी और 13 सितंबर 2020 को उनकी मौत हो गई। इंद्रकांत त्रिपाठी के भाई की तहरीर पर पाटीदार व अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इसके बाद 22 जुलाई 2021 को भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया और मामले की सुनवाई लखनऊ की भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में चल रही थी। अब इस मामले की सुनवाई मंडल मुख्यालय बांदा के भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय में हो रही है.


