INX Media case Supreme Court allows P Chidambaram to withdraw plea against CBI Remand - INX Media Case: ईडी मामले में SC से झटके के बाद चिदंबरम ने वापस ली CBI से जुड़ी याचिका DA Image
9 दिसंबर, 2019|3:53|IST

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INX Media Case: ईडी मामले में SC से झटके के बाद चिदंबरम ने वापस ली CBI से जुड़ी याचिका

उच्चतम न्यायालय ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में गैर जमानती वारंट जारी करने और हिरासत में लिए जाने के निचली अदालत के आदेशों के खिलाफ दायर याचिका वापस लेने की बृहस्पतिवार को अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ से चिदंबरम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उन्होंने बिना शर्त यह याचिका वापस लेने का निर्णय लिया है। इसके बाद पीठ ने याचिका वापस लेने की अनुमति देने संबंधी आदेश पारित किया।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ''(चिदंबरम की ओर से पेश) वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, निर्देश पर, याचिका वापस लेना चाहते हैं। याचिका खारिज की जाती है क्योंकि इसे वापस ले लिया गया है। सभी अंतरिम आदेश हटाये जाते हैं।" पीठ ने रजिस्ट्री को यह भी निर्देश दिया कि आईएनएक्स मीडिया धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा सीलबंद लिफाफे में पेश दस्तावेज उसे लौटा दिये जायें। पीठ ने कहा कि हमने इन दस्तावेजों का अवलोकन नहीं करने का निर्णय लिया है और इन्हें उनको वापस दिया जा रहा है।

केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने 2007 में तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड से आईएनएक्स मीडिया समूह को 305 करोड़ रूपए के विदेशी निवेश की मंजूरी देने में हुईं कथित अनियमितताओं को लेकर 15 मई, 2017 को प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद ही प्रवर्तन निदेशालय ने 2017 में धन शोधन का मामला दर्ज किया था। सीबीआई द्वारा दर्ज आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में चिदंबरम की अग्रिम जमानत की याचिका दिल्ली उच्च न्यायालय ने 20 अगस्त को खारिज कर दी थी।

चिदंबरम को झटका, न्यायालय का आईएनएक्स मीडिया मामले में अग्रिम जमानत देने से इंकार

वहीं दूसरी ओर, पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को बृहस्पतिवार को उस समय बड़ा झटका लगा जब उच्चतम न्यायालय ने आईएनएक्स मीडिया धनशोधन मामले में उन्हें अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया। यह मामला प्रवर्तन निदेशालय ने दर्ज किया है। शीर्ष अदालत ने चिदंबरम को अग्रिम जमानत देने से इंकार करने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के 20 अगस्त के फैसले को चुनौती देने वाली कांग्रेस नेता की अपील खारिज करते हुये कहा कि आर्थिक अपराध के मामलों में अलग तरीके से निबटना होगा क्योंकि यह देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं।

न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह अग्रिम जमानत देने के लिये उचित मामला नहीं है। पीठ ने कहा कि इस समय चिदंबरम को अग्रिम जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है। पीठ ने कहा कि जांच एजेन्सी को इस मामले में अपनी जांच करने के लिये पर्याप्त स्वतंत्रता दी जानी होगी।

शीर्ष अदालत ने चिदंबरम की वह अर्जी भी खारिज कर दी जिसमे यह अनुरोध किया गया था कि तीन तारीखों पर उनसे की गयी पूछताछ की लिपि पेश करने का प्रवर्तन निदेशालय को निर्देश दिया जाये। न्यायालय ने कहा कि उसे मुकदमे की सुनवाई शुरू होने से पहले ही केस डायरी का अवलोकन करने का अधिकार है परंतु उसने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा सीलबंद लिफाफे में पेश दस्तावेजों का अवलोकन करने से गुरेज किया है क्योंकि इससे दूसरे अभियुक्तों मामला प्रभावित हो सकता था।

पीठ ने कहा कि अग्रिम जमानत प्राप्त करने का अधिकार नहीं है और इससे इंकार करने से संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन नहीं होता है।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि चिदंबरम नियमित जमानत के लिये संबंधित अदालत में याचिका दायर कर सकते हैं।

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