लोकबंधु में नवजात शिशु की मौत की जांच पर उठे सवाल
आशियाना स्थित लोकबंधु राजनारायण अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात शिशु की मौत के मामले में जांच समिति की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं। परिवार ने डॉक्टरों को बचाने का आरोप लगाया है और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद सभी डॉक्टरों की भूमिका की जांच की जरुरत है।

आशियाना स्थित लोकबंधु राजनारायण अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात शिशु की मौत के मामले में गठित जांच समिति की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। पीड़ित परिवार ने जिम्मेदार डॉक्टरों को बचाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पूरे मामले में सिर्फ रात की ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को नोटिस देकर औपचारिकता पूरी की जा रही है। जबकि दिन की ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों की भूमिका की अनदेखी की गई है। परिजनों के मुताबिक वे गर्भवती महिला को दोपहर करीब तीन बजे अस्पताल लेकर पहुंचे थे। उस समय ड्यूटी पर मौजूद वरिष्ठ महिला रोग विशेषज्ञ ने मरीज का परीक्षण नहीं किया। उनका आरोप है कि यदि गर्भवती की समय रहते जांच कर प्रसव कराया जाता तो नवजात शिशु की जान बचाई जा सकती थी। जांच समिति ने पूरे घटनाक्रम में दोपहर दो बजे के बाद ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर से न तो कोई पूछताछ की और न ही उनका स्पष्टीकरण मांगा। इसके विपरीत केवल रात की ड्यूटी करने वाली डॉक्टर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। इससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि जांच तभी निष्पक्ष मानी जाएगी, जब घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद सभी डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका की समान रूप से जांच की जाए। परिवार ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है。
ये थी घटना
आशियाना स्थित सीता विहार कालोनी निवासी कीर्ति पाल को रविवार को करीब तीन बजे प्रसव पीड़ा के बाद लोकबंधु में भर्ती कराया गया था। पति शुभम ने बताया कि सोमवार की सुबह लेबर रूम में प्रसव हुआ था। जहां शिशु फर्श पर गिर गया था। सिर पर गहरी चोट से शिशु की तबीयत गंभीर हो गई थी। डॉक्टर-कर्मचारियों की हीलाहवाली की कीमत शिशु को जान गंवाकर चुकानी पड़ी थी। परिवारीजनों की जिद पर शिशु का पोस्टमार्टम कराया गया था।


