टेलीकॉम कंपनियों को चूना लगाने वाले गिरोह का भंडाफोड़
-- क्राइम ब्रांच ने चार आरोपियों को किया गिरफ्तार -- ये रिमोट रेडियो यूनिट्स की

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। राजधानी समेत देश के कई राज्यों में मोबाइल नेटवर्क ठप करने और टेलीकॉम कंपनियों को अरबों रुपये का चूना लगाने वाले एक अंतरराज्यीय सिंडिकेट का दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने भंडाफोड़ किया है। क्राइम ब्रांच ने मोबाइल टावरों से कीमती रिमोट रेडियो यूनिट्स (आरआरयू) चोरी करने, उन्हें स्टोर करने और फिर फर्जी दस्तावेजों के सहारे एयर कार्गो के जरिए हांगकांग एक्सपोर्ट करने वाले गिरोह के चार मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इस बड़े ऑपरेशन के दौरान 70 लाख मूल्य के 43 आरआरयू उपकरण बरामद किए हैं। इस कार्रवाई से दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में दर्ज चोरी के 19 बड़े मामलों को सुलझा लिया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का मास्टरमाइंड दिल्ली के संगम विहार निवासी विकास पासवान शामिल है। यह दिल्ली के यमुनापार और मेरठ के नेटवर्क को संभालता था। अन्य आरोपियों में दिल्ली के हर्ष विहार निवासी हेमंत गुप्ता, गाजियाबाद निवासी फरीद, मेरठ निवासी शेर मोहम्मद शामिल हैं。
गिरोह की सूचना
क्राइम ब्रांच ने बताया कि उनकी टीम को सूचना मिली कि देश के अलग-अलग राज्यों से चोरी किए गए आरआरयू उपकरणों को दिल्ली के ट्रांस-यमुना इलाके में छुपाकर कूरियर के लिए तैयार किया जा रहा है। जांच आगे बढ़ी तो यह खुलासा हुआ है कि आरआरयू की एक बहुत बड़ी खेप विदेश भेजने के लिए गिरोह के लोग महिपालपुर की एक कूरियर एजेंसी आने वाले हैं। सूचना मुताबिक टीम ने महिपालपुर में गोदाम और कूरियर ऑफिस के पास घेराबंदी की और सबसे पहले हेमंत गुप्ता को एक गाड़ी के साथ रोका गया, जिसमें 19 चोरी के आरआरयू लदे थे। उसके साथ विकास पासवान को भी दबोचा गया। कुछ ही देर बाद, यूपी के मेरठ और गाजियाबाद से फरीद और शेर मोहम्मद अपनी स्विफ्ट कार से वहां पहुंचे। उनकी कार की तलाशी लेने पर नौ और चोरी के आरआरयू बरामद हुए। गोदाम की तलाशी के दौरान चार और आरआरयू मिले। इसी बीच, एक पोर्टर (कुली) गाड़ी लेकर पहुंचा, जिसमें 11 आरआरयू थे।
आरआरयू की हांगकांग भेजने की रिपोर्ट
पूछताछ में खुलासा हुआ है कि 8-9 महीने से यह गिरोह सक्रिय था। जांच एजेंसियों की नजरों से बचकर अब तक 800 से अधिक चोरी की हुई आरआरयू यूनिट्स को हांगकांग भेजा जा चुका था। पुलिस ने बताया कि चोरी के इन उपकरणों को दिल्ली के यमुनापार इलाके के गोदामों में रखा जाता था।


