देशज ज्ञान का पुनर्जीवन सतत विकास के लिए जरूरी : प्रो. श्वेता प्रसाद
हिन्दुस्तान, प्रयागराज
ईश्वर शरण पीजी कॉलेज में देशज ज्ञान परंपराओं पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का समापन हुआ। प्राचार्य प्रो. आनंद शंकर सिंह ने कहा कि स्वदेशी ज्ञान को समुदाय समझकर नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। सेमिनार में 150 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए, जिसमें स्वदेशी ज्ञान का महत्व और राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर चर्चा की गई।

ईश्वर शरण पीजी कॉलेज में देशज ज्ञान परंपराओं पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का शनिवार को समापन हुआ। बीएचयू की कार्यकारी परिषद सदस्य एवं समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रो. श्वेता प्रसाद ने कहा कि स्वदेशी ज्ञान को पुनर्जीवित करना केवल अतीत की ओर लौटना नहीं, बल्कि सतत विकास, पारिस्थितिक अस्तित्व और सामाजिक न्याय के लिए जरूरी है। जीबी पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्वदेशी ज्ञान परंपरा को शिक्षा और पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की परिकल्पना है। प्राचार्य प्रो. आनंद शंकर सिंह ने कहा कि देशज ज्ञान को उसी समुदाय और धरातल से समझकर नई पीढ़ी तक पहुंचाना होगा।
सेमिनार में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने शोधपत्र प्रस्तुत किए। अंतिम दिन 150 शोधपत्रों का वाचन हुआ।


