DA Image
6 मार्च, 2021|2:43|IST

अगली स्टोरी

बीमारी छुपाई तो नहीं मिलेगा बीमा क्लेम, पढ़ें क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह बीमित व्यक्ति कि जिम्मेदारी है कि पॉलिसी लेते समय अपनी सभी बीमारियों और इलाज की जानकारी बीमाकर्ता को दे। ऐसा नहीं करने पर उसे क्लेम से वंचित किया जा सकता है।

इस मामले में बीमाकर्ताओं ने एक फार्म दिया जिसमे पूर्व और मौजूदा बीमारियों को लेकर घोषणा थी और पूछा गया था कि क्या उसे ये बीमारियां हैं, साथ ही क्या कभी उसने इन बीमारियां का इलाज करवाया है, लेकिन बीमित व्यक्ति ने सभी कालम को न में भरा। इसका मतलब वह कभी बीमार नहीं था और कभी इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती नहीं हुआ था। उसकी इन घोषणाओं के बाद बीमाकर्ता ने उसे पॉलिसी दे दी। इसके एक माह बाद ही बीमित व्यक्ति की मौत हो गई।

मृतक की मां ने बीमा रकम का दावा किया जिसे कंपनी ने ठुकरा दिया और कहा कि जांच में पता चला है जिन बीमारियों से उसके बेटे कि मौत हुई है वह उसे पहले से ही थीं। पीड़ित पेट के विकार से पीड़ित था और उसे कई बार खून की उल्टियां भी हुई थीं। इनके लिए वह अस्पताल से इलाज भी करवा रहा था। पीड़ित की मां ने इस मामले को जिला उपभोक्ता अदालत में उठाया और अदालत ने क्लेम की एक करोड़ रुपए की रकम जारी करने का आदेश दिया।

इस मामले में बीमा कंपनी की अपील राज्य और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोगों ने भी खारिज कर दी और कहा की मृतक की बीमारी प्राकृतिक थी। इस फैसले को बिना कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी कि अपील स्वीकार कर ली,  बीमा कंपनी से कहा कि वह पीड़ित कि मां को अदा कर दी गई रकम वापस नहीं ले क्योंकि वह 80 साल की हैं।
 

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Insurance claim will not be available if the disease is hidden read what is the order of the Supreme Court