फोरम से : कैंसर छिपाकर ली बीमा पॉलिसी, 1.60 लाख का दावा खारिज
बीमा पॉलिसी में कैंसर की बीमारी छिपाने के कारण जिला उपभोक्ता आयोग ने यशोदा के 1.60 लाख रुपये के दावे को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि विजेंद्र ने बीमारी की जानकारी नहीं दी थी, जबकि वह कैंसर से पीड़ित थे। सभी दावों को खारिज करते हुए यशोदा को अपना खर्च सहेजने का आदेश दिया गया।

बीमा पॉलिसी के समय कैंसर की बीमारी छिपाना नॉमिनी को भारी पड़ा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कैंसर की बीमारी छिपाकर ली गई स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के आधार पर दाखिल 1.60 लाख रुपये के दावे को खारिज कर दिया। आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से दावा निरस्त करने की कार्रवाई को उचित माना। साथ ही ब्याज, मानसिक-शारीरिक क्षति, आर्थिक नुकसान और वाद खर्च की मांग भी ठुकरा दी। मामला कैलसा बॉर्डर निवासी यशोदा से जुड़ा था। उनके पति विजेंद्र ने एक बैंक के माध्यम से स्वास्थ्य बीमा कराया था। चार हजार रुपये प्रीमियम वाली यह पॉलिसी 29 फरवरी 2020 से 24 फरवरी 2022 तक मान्य थी और इसके तहत 1.60 लाख रुपये का बीमा कवर था।
25 मार्च 2021 को विजेंद्र की अचानक सीने में दर्द के बाद मौत हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी यशोदा ने नॉमिनी के रूप में बीमा राशि का दावा पेश किया। बीमा कंपनी ने जांच के बाद दावा खारिज कर दिया। कंपनी के निर्णय से असंतुष्ट यशोदा ने जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दाखिल की। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने बताया कि विजेंद्र साल 2017 से कैंसर का इलाज करा रहे थे। हिमालयन अस्पताल जॉलीग्रांट देहरादून के मेडिकल दस्तावेज और बायोप्सी रिपोर्ट में गर्दन के कैंसर की पुष्टि हुई थी। कंपनी का कहना था कि पॉलिसी लेते समय प्रस्ताव पत्र में इस बीमारी की जानकारी नहीं दी गई। आयोग ने मेडिकल दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद माना कि विजेंद्र को पॉलिसी लेने से पहले ही कैंसर था और उन्हें अपनी बीमारी की जानकारी भी थी। बावजूद इसके उन्होंने फॉर्म भरते में अपनी बीमारी का जिक्र नहीं किया। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के संबंधित फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बीमा अनुबंध में प्रस्तावक का दायित्व है कि वह ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा करे, जो बीमा कंपनी के निर्णय को प्रभावित कर सकती है। बीमारी छिपाना दायित्व का उल्लंघन है। आयोग के अध्यक्ष रमा शंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने यशोदा की सभी मांगें खारिज करते हुए दोनों पक्षों को अपना-अपना खर्च वहन करने का आदेश दिया।


