दुर्घटनाग्रस्त कार का 30.31 लाख क्लेम नौ प्रतिशत ब्याज के साथ देने का आदेश
गुरुग्राम,प्रमुख संवाददाता। सड़क हादसे में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई कार का बीमा क्लेम खारिज करना एक इंश्योरेंस कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता वि

गुरुग्राम, गौरव चौधरी। सड़क हादसे में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई कार का बीमा क्लेम खारिज करना एक इंश्योरेंस कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी की दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए पीड़ित महिला को 30.31 लाख का क्लेम नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ चुकाने का कड़ा आदेश दिया है। इसके अलावा, कंपनी को मानसिक उत्पीड़न के बदले दो लाख का मुआवजा और कानूनी खर्च के रूप में 50 हजार भी देने होंगे। यह राहत भरा फैसला जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की सदस्य खुशविंदर कौर की पीठ ने सुनाया है。
बीमा क्लेम की पृष्ठभूमि
नूंह के वार्ड नंबर 10 की रहने वाली सुमित्रा देवी ने आयोग में दायर अपनी याचिका में बताया था कि छह जुलाई 2021 की रात करीब दो बजे उनका बेटा मुकेश अपने साथी गुरुचरण सिंह के साथ राजस्थान के अलवर स्थित पांडुपोल जा रहा था। जब उनकी बीएमडब्ल्यू कार राजस्थान के नौगांव के पास पहुंची, तो सामने से आ रही एक अन्य गाड़ी से उसकी जोरदार भिड़ंत हो गई। दुर्घटना में गुरुचरण सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। हादसे में कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। बीएमडब्ल्यू वर्कशॉप की ओर से गाड़ी की मरम्मत का अनुमानित खर्च 56 लाख बताया गया। चुंकि मरम्मत का खर्च गाड़ी की बीमा राशि से अधिक था, इसलिए इसे पूरी तरह क्षतिग्रस्त माना गया।
बीमा कंपनी की दलील
बीमा पॉलिसी के तहत गाड़ी का कुल इंश्योरेंस मूल्य 30.31 लाख निर्धारित था। बीमा कंपनी ने कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि सड़क हादसे के कारणों की जानकारी गलत या संदिग्ध दी गई है। दोनों पक्षों की दलीलें और सबूत देखने के बाद उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी के रवैये को सेवा में गंभीर कोताही माना। आयोग ने स्पष्ट किया कि बिना किसी ठोस आधार के क्लेम रोकना गलत है। आयोग द्वारा स्वीकृत राशिमूल बीमा राशि 30 लाख 31 हजार रुपये नौ प्रतिशत ब्याज के साथ मानसिक उत्पीड़न का मुआवजा दो लाख कानूनी प्रक्रिया का खर्च 50 हजार रुपये देने के आदेश दिए।


