उपभोक्ता अधिकार: रोडवेज संविदाकर्मी को बीमा क्लेम से इनकार पड़ा भारी, कंपनी देगी 10 लाख
द क्लेम खारिज करने पर उपभोक्ता आयोग ने माना सेवा में कमी -रोडवेज चालक कंट्रीब्यूटरी अनमैन्ड ग्रुप व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा पॉलिसी का मामला -पॉलिसी के त

सहारनपुर। रोडवेज संविदाकर्मी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद बीमा क्लेम से इनकार करना बीमा कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मामले में बीमा कंपनी की सेवा में कमी मानते हुए मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपये का बीमा क्लेम ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही मानसिक एवं शारीरिक क्षतिपूर्ति के रूप में 30 हजार रुपये देने को भी कहा है। मामला रोडवेज चालक रणवीर सिंह से जुड़ा है। रणवीर सिंह की संविदा 12 सितंबर 2017 को हुई थी। रोडवेज की ओर से चालकों के लिए संचालित कंट्रीब्यूटरी अनमैन्ड ग्रुप पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस पॉलिसी में हर माह उनके खाते से प्रीमियम की राशि काटी जा रही थी।
ये पॉलिसी 28 अगस्त 2017 से प्रभावी थी। इसी दौरान 2 अक्टूबर 2017 को सड़क दुर्घटना में रणवीर सिंह की मृत्यु हो गई। बेहट के मोहम्मदपुर कंधेला गांव निवासी परिजनों पत्नी आशु व बच्चों गोल्डन, खुशी और हार्दिक चौधरी की ओर से बीमा क्लेम प्रस्तुत किया गया, लेकिन कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि पॉलिसी संविदा शुरू होने से पहले की थी। मामले में रोडवेज के आरएम और जीएम ने भी चालक के पक्ष का समर्थन किया। अधिकारियों ने आयोग को बताया कि पॉलिसी में नए सदस्यों को शामिल किए जाने का प्रावधान था और रणवीर सिंह के वेतन से नियमित रूप से प्रीमियम की कटौती की गई थी।मामला उपभोक्ता अदालत पहुंचा जहां सुनवाई में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग अध्यक्ष सतीश कुमार अत्री व सदस्य नूतन शर्मा व राजीव कुमार की पीठ ने बीमा कंपनी के तर्क को स्वीकार नहीं किया और क्लेम से इनकार को सेवा में कमी माना और बीमा राशि 10 लाख रुपये ब्याज सहित व 30 हजार रुपये बतौर मानसिक एवं शारीरिक क्षतिपूर्ति की एवज में अदा करने के आदेश दिए।


