जन्माष्टमी: गीता के सूत्रों से संस्कारित हो रहे युवा
वाराणसी में हरे कृष्ण हरे राम संकीर्तन सोसाइटी की प्रेरक कहानी है। 26 वर्ष पहले चार युवाओं ने गीता के सूत्रों से संस्कारित करने का महाभियान शुरू किया। अब 4000 से अधिक सदस्य हैं, जो गीता के श्लोकों का अध्ययन करते हैं। बालक-बालिकाओं को समर्थित करने के साथ ही सोसाइटी ने महत्वपूर्ण बदलाव भी किए हैं।

वाराणसी। कभी इस्कॉन के लिए सेवाएं देने वाले चार श्रीकृष्णानुरागियों की दूर दृष्टि और पक्के इरादे की प्रेरक कहानी है हरे कृष्ण हरे राम संकीर्तन सोसाइटी। अब से 26 वर्ष पूर्व चार लोगों ने यह कोशिश शुरू की, जो वर्तमान में युवाओं को गीता के सूत्र से संस्कारित करने का महाभियान बन चुकी है। अब से 26 वर्ष पीछे चलें तो इस्कॉन के तत्कालीन संगठन से जुड़े चार युवाओं कृष्णप्रताप प्रभु, संजय प्रभु, राघवेंद्र प्रभु और मुकेश प्रभु ने आत्मसंतुष्टि के लिए इस्कॉन से स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्य करने का निर्णय किया। चार लोगों से शुरू हुआ यह सिलसिला 26 वर्षों में चार हजार से अधिक संख्या वाले विस्तृत गीता परिवार के रूप में समृद्ध हो चुका है।
कृष्णप्रताप प्रभु बताते हैं कि 04 से 15 वर्ष उम्र तक के 150 से अधिक बालक-बालिकाएं गीता के श्लोकों को आत्मसात कर रहे हैं। उन्हें एक-एक श्लोक के उच्चारण के तरीके से लेकर उसकी व्याख्या तक सिखाई जाती है। प्रत्येक विद्यार्थी श्लोक स्वयं बोलता है, उसकी व्याख्या करता है। इसका वीडियो बनाकर सोसाइटी के व्हाटसऐप ग्रुप में प्रेषित करता है। जो अच्छा करते हैं उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है। जो नहीं कर पाते हैं उन्हें बेहतर करने के लिए प्रेरित किया जाता है। यही नहीं सोसाइटी ने दो और बड़े परिवर्तन किए हैं। एक तो यह कि विशेष उत्सवों से लेकर दैनिक पूजा पाठ तक में नृसिंह आरती का गायन करने का जिम्मा बालवर्ग को ही सुपुर्द कर दिया गया है। साथ ही तुलसी आरती का दायित्व मातृशक्ति को दिया गया है। देशभर में नृसिंह आरती वयस्क गाते हैं और तुसली आरती पुरुष ही करते हैं।यह सोसाइटी का सौभाग्य है कि मिलन और सरस्वती जैसे समर्पित युवा साथ जुड़े हैं। मिलन अहमदाबाद में इंजीनियरिंग की कोचिंग चलाते हैं, लेकिन श्रीकृष्णजन्माष्टमी के उत्सव में शृंगार सेवा देने के लिए वह प्रतिवर्ष काशी में प्रस्तुत रहते हैं। वहीं सरस्वती इन दिनों बंगलुरु के एक कॉलेज से मासकॉम की पढ़ाई कर रही हैं। उन्हें बेंगलुरु इस्कॉन में नृसिंह आरती का गायन करने के लिए प्रत्येक सप्ताह आमंत्रित किया जाता है। वृंदावन ही नहीं, पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में महिलाएं भी सोसाइटी की स्थायी सदस्य बन चुकी हैं।


