पढ़ाने के अनूठे अंदाज़ और नवाचार से जीता राष्ट्रीय पुरस्कार
पढ़ाने के अनूठे अंदाज़ और नवाचार से जीता राष्ट्रीय पुरस्कार नई दिल्ली। विशेष संवाददाता शिक्षा के क्षेत्र में पढ़ाने के अनूठे अंदाज़ , नवाचार, समावेशी शिक्षण, तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल और वंचित वर्गों...

पढ़ाने के अनूठे अंदाज़ और नवाचार से जीता राष्ट्रीय पुरस्कार नई दिल्ली। विशेष संवाददाता
शिक्षकों का सम्मान
शिक्षा के क्षेत्र में पढ़ाने के अनूठे अंदाज़ , नवाचार, समावेशी शिक्षण, तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल और वंचित वर्गों के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए देशभर के 48 स्कूली शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया गया। जबकि उच्च शिक्षा और कौशल श्रेणी को जोड़कर कुल 82 शिक्षकों को राष्ट्रीय सम्मान मिला है। पुरस्कार पाने वालों में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तराखंड के भी कई शिक्षक शामिल हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में शिक्षा की तस्वीर बदलने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है।
उत्तर प्रदेश के शिक्षक
उत्तर प्रदेश से तीन स्कूली शिक्षक सम्मानित हुए हैं। इनमें बलिया के राजकीय इंटर कॉलेज के कला शिक्षक डॉ. इफ्तेखार खान शामिल हैं। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए रविवार को निःशुल्क कला शिक्षा की व्यवस्था की और उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने कला प्रतियोगिताओं के साथ आईआईटी, एनआईडी, बीएचयू और जामिया मिल्लिया इस्लामिया जैसे संस्थानों में प्रवेश हासिल किया।
मॉडल संस्थान
गाजियाबाद की डॉ. रेनू त्रिपाठी का अभिनव शिक्षण
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, विजय नगर की विज्ञान शिक्षिका डॉ. रेनू त्रिपाठी को सम्मान मिला । उन्होंने विज्ञान को प्रयोगात्मक और तकनीक आधारित तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए उल्लेखनीय कार्य किया है। वह मॉडल, प्रयोग, क्षेत्रीय भ्रमण और डिजिटल माध्यमों के जरिए कठिन वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल बनाने का प्रयास करती हैं। वह विद्यार्थियों के लिए यूट्यूब चैनलों के माध्यम से भी शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराती हैं।
शिक्षा में रचनात्मकता
कौशाम्बी की शालिनी कुशवाहा ने बुनियादी साक्षरता और गणित को रोचक बनाने के लिए कहानी, कला, डिजिटल संसाधनों और एआई आधारित उपकरणों का इस्तेमाल किया। वहीं आईआईटी कानपुर के प्रो. शंकर प्रसाद रथ को उच्च शिक्षा और शोध में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने रसायन विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध के साथ विद्यार्थियों के मार्गदर्शन और स्वयम्-एनपीटीईएल के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षण में भी योगदान दिया है।
बिहार की शिक्षिकाएं
बिहार से दो शिक्षिकाओं को पुरस्कार मिला है। बांका की खुशबू कुमारी ने गतिविधि आधारित और समावेशी प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा दिया। उनके प्रयासों से विद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति करीब 50 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत से अधिक हुई।
गोपालगंज की पुष्पा प्रसाद ने कम लागत वाली शिक्षण सामग्री, डिजिटल साधनों, प्रयोगों, कहानियों और कला आधारित गतिविधियों के जरिए बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ाने का काम किया।
झारखंड की शिक्षिका
झारखंड से एक शिक्षिका को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिला है। धनबाद की मुनमुन भट्टाचार्य ने कोयला खनन क्षेत्र के वंचित समुदाय के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए कम लागत वाली शिक्षण सामग्री, कला आधारित शिक्षा और व्यावसायिक गतिविधियों को अपनाया। उन्होंने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने, बालिकाओं की सुरक्षा और ड्रॉपआउट रोकने के लिए भी काम किया।
उत्तराखंड की उपलब्धियां
उत्तराखंड से पौड़ी गढ़वाल के स्कूल शिक्षक गबर सिंह ने दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में 35 वर्षों तक शिक्षा और स्टेम शिक्षण को बढ़ावा दिया। उन्होंने आईसीटी, गणित के डिजिटल संसाधनों, जियोजेब्रा और 3-डी सिमुलेशन और कबाड़ से जुगाड़ जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाया।
उत्तराखंड के उच्च शिक्षा क्षेत्र से प्रो. अवलोकिता अग्रवाल और डॉ. मनीषा निगम को भी सम्मानित किया गया। प्रो. अग्रवाल ने सतत वास्तुकला और ग्रामीण सहभागिता के क्षेत्र में काम किया, जबकि डॉ. निगम ने विद्यार्थी-केंद्रित जैव रसायन शिक्षण, शोध, नवाचार और सामुदायिक जागरूकता के क्षेत्र में योगदान दिया।
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