शिक्षा, साहित्य और पर्यावरण संरक्षण में उत्कृष्ट कार्यों से बनाई अलग पहचान
छिबरामऊ के एक शिक्षक ने शिक्षा, साहित्य और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पिछले 20 वर्षों में उन्होंने 50,000 से अधिक पौधों का रोपण किया है और लोगों को जागरूक कर रहे हैं। उनके साहित्यिक कार्यों में पांच प्रकाशित ग्रंथ शामिल हैं और विभिन्न पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं।

छिबरामऊ, संवाददाता। शिक्षा, साहित्य और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षक ने अपनी रचनात्मक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों से अलग पहचान बनाई है। पर्यावरण संरक्षण के लिए पिछले करीब 20 वर्षों से लगातार प्रयास करते हुए 50 हजार से अधिक पौधों का रोपण कराया गया है। इसके साथ ही लोगों को पौधरोपण और प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करने का कार्य भी किया जा रहा है। साहित्य के क्षेत्र में भी उनकी सक्रियता उल्लेखनीय है। उनके पांच ग्रंथ प्रकाशित हो चुके हैं। इनमें ओजस, रंगों में फूल चमन के, सरस लोचन तथा मानस स्मृति ग्रंथ सहित अन्य रचनाएं शामिल हैं।
दो अन्य ग्रंथ प्रकाशन की प्रक्रिया में हैं। इसके अलावा पुष्प तुम्हारे चरण तुम्हारे, हे मानस की मानसी, महान अशोक स्तंभ, जागो और जगाओ, नारी सशक्तीकरण, शहीदों तुम्हें सलाम है तथा संकल्प संदेश जैसी रचनाएं भी तैयार की गई हैं। उन्होंने विभिन्न साहित्यिक संकलनों में भी योगदान दिया है। उनकी साहित्यिक और सामाजिक सेवाओं के लिए महाकवि सूरदास काव्यरत्न सम्मान, पर्यावरण रत्न सम्मान, काव्य शिरोमणि सम्मान, बृज साहित्य रत्न सम्मान, सरस्वती गंगाप्रसाद साहित्य सम्मान, पर्यावरण प्रहरी सम्मान समेत अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें विभिन्न संस्थाओं की ओर से 60 से अधिक सम्मान मिल चुके हैं। शिक्षा के साथ साहित्य और पर्यावरण संरक्षण को जोड़कर किए जा रहे उनके प्रयास क्षेत्र में प्रेरणादायी माने जा रहे हैं।


