मटर की नई किस्म काशी तृप्ति की छिलका सहित बनेगी सब्जी
कुशीनगर में मटर की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान ने एक नई किस्म 'काशी तृप्ति' विकसित की है, जिसकी फली को छिलके सहित सब्जी के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है।

कुशीनगर, मिथिलेश द्विवेदी। मटर की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी के वैज्ञानिकों ने सब्जी मटर की एक ऐसी नई किस्म विकसित की है, जिसकी फली को छिलके सहित सब्जी के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। काशी तृप्ति नाम की इस किस्म को लेकर कुशीनगर के किसान जागरूक हुए हैं। बकनहा के दो दर्जन से अधिक किसानों ने इसकी खेती करने का मन बनाए हैं। वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह किस्म किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मटर के उपयोग को भी नया आयाम दे सकती है। किसान गन्ना के साथ मटर की सहफसली खेती करके सिर्फ 90 दिन में करीब डेढ़ लाख रूपये का 40 से 45 कुंतल पैदा कर अतिरिक्त आय कमा सकते हैं।
नई किस्म की विशेषताएं
भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी के वैज्ञानिकों ने सब्जी मटर की नई किस्म काशी तृप्ति विकसित किया है। इस किस्म के मटर का छिलके सहित सब्जी बनेगी। मटर प्रजाति विकसित करने वाले वैज्ञानिक डा. ज्योति ने बताया कि इसकी बुवाई अक्तूबर के अंतिम सप्ताह से 20 नवम्बर तक होगी। एक एकड़ बोने के लिए 45 से 50 किग्रा बीज चाहिए। बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त है। खेत की अच्छी तैयारी करें एवं 50 कुन्तल गोबर की सड़ी खाद, 5 किग्रा ट्राईकोडर्मा प्रति एकड़ प्रयोग कर जुताई करके मिट्टी में मिला दें। मटर के लिए 15 किग्रा यूरिया, 53 किग्रा डीएपी, 34 किग्रा म्यूरेट आफ पोटाश प्रति एकड़ प्रयोग करें।
बुवाई की विधि और पैदावार
पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेमी तथा बीज से बीज की दूरी 10 सेमी पर बुवाई करें। बुवाई के 85-90 दिन पर सब्जी के लिए फली निकलना प्रारम्भ होती है। सब्जी के लिए हरी फली की उपज 35 से 40 कुन्तल प्रति एकड़ प्राप्त होगी, जिसका बाजार की कीमत करीब सवा लाख से डेढ लाख रूपये होगी। वहीं दाना व बीज के लिए बुवाई के 135 दिनों पर तोड़ाई से इसका उपज 45 से 50 कुन्तल होगा। गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केन्द्र गोरखपुर के पूर्व सहायक निदेशक, गन्ना विकास सलाहकार ओम प्रकाश गुप्ता ने कुशीनगर के बकनहा में खेतों तक पहुंचे कृषि विज्ञान कार्यक्रम में इसके बारे में किसानों को जागरूक करते हुए बताया कि इस किस्म में छिलके भी पूरी तरह खाने योग्य हैं। सामान्य मटर में 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा छिलके के रूप में निकल जाता है।
पोषण और स्वास्थ्य लाभ
यह मटर प्रोटीन, फाइबर, विटामिन से भरपूर है। इस प्रजाति को किसान बकला की सब्जी की तरह बनाकर सेवन करते हैं। पिछले साल यह प्रजाति विकसित हुई थी। उसका बीज मिलना शुरू हो गया है। बकनहा के दो दर्जन से अधिक किसानों ने नई मटर की प्रजाति की बुवाई के लिए आईवीआरआई पोर्टल, इंडियन वेजिटेबल रिचर्स इंस्टीट्यूट यानि भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान साइट पोर्टल के माध्यम से आर्डर देकर मंगवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि किसान शरदकालीन गन्ने के साथ सब्जी मटर की दो या तीन लाइन बोकर कम समय में दोहरा लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
किसानों की आय में बढ़ोतरी
उन्नत किस्म प्रजातियां ही अधिक उपज देंगी। वहां की विकसित लोबिया की प्रजाति काशी कंचन भी किसानों में बहुत लोकप्रिय है। गन्ने के साथ सब्जी की सहफसली खेती से किसानों की आय बढ़ेगी, लागत घटेगी, गन्ने की दो लाइन के बीच खाली स्थान का भरपूर उपयोग होगा, खरपतवारों का संघर्ष कम होगा। किसानों को कीट वैज्ञानिक डा. कुलदीप श्रीवास्तव व वैज्ञानिक डा. रामेश्वर सिंह ने पालक, मूली, बैंगन, मिर्च, गाजर, सब्जी मटर, फ्रेन्च बीन, टमाटर आदि का बीज के बारे में जानकारी देकर जागरूक किया है।
बोले जिम्मेदार
मटर की नई किस्म काशी तृप्ति किसानों के लिए वरदान साबित होगी। वाराणसी से किसान नई किस्म की मटर की बीज मंगवा रहे हैं। इसे गन्ने के साथ सहफसली खेती के रूप में करके दोगुनी आय की कमाई की सकती है। कुशीनगर के बकनहा के दो दर्जन से अधिक किसानों ने इसकी बुवाई के लिए वाराणसी बीज के लिए आर्डर दिये हैं।
ओपी गुप्ता, पूर्व सहायक निदेशक, गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केन्द्र गोरखपुर व गन्ना विकास सलाहकार


