फ्लायर या सेकेंड लीड-उद्घाटन से पहले ही दरक गई 3792 करोड़ की मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन, एनएचएआई ने बैठाई जांच
बाई तक और दो इंच चौड़ी दरार देखने को मिली है। इस घटना के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता सीधे तौर पर कटघरे में आ गई है। एनएचएआई में हड़कंप, मौके पर भेज

मुंगेर, निज संवाददाता।बिहार में बुनियादी ढांचे के विकास और दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है। लगभग 3,792 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बन रहे 125 किलोमीटर लंबे मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन पर उद्घाटन से पहले ही गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भागलपुर जिले के गनगनिया के समीप निर्माणाधीन फोरलेन की डाउन लाइन (मुंगेर-भागलपुर लेन) में अचानक करीब 40 मीटर लंबाई तक और दो इंच चौड़ी दरार देखने को मिली है। इस घटना के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता सीधे तौर पर कटघरे में आ गई है। एनएचएआई में हड़कंप, मौके पर भेजी गई टीमः
एनएचएआई की स्थिति:
मामला उजागर होते ही एनएचएआई के गलियारों में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में परियोजना निदेशक ने जांच टीम गठित कर मौके पर रवाना कर दी है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक मनीष कुमार ने बताया कि फोरलेन का निर्माण कार्य अभी प्रगति पर है। शुरुआती इनपुट के मुताबिक, सड़क के सबग्रेड वर्क में यह दरार आई है। उन्होंने कहा कि बिटुमिन सेटलमेंट के दौरान भी ऐसी स्थिति बन सकती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में कोई गंभीर तकनीकी खामी या लापरवाही पाई गई, तो सिर्फ पैचवर्क या मरम्मत नहीं होगी, बल्कि उस पूरे हिस्से को तोड़कर नए सिरे से बनाया जाएगा। फिलहाल अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
श्रावणी मेले की चिंताएँ:
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य मांटी कार्लो एजेंसी द्वारा एनएचएआई की देखरेख में किया जा रहा है। आगामी श्रावणी मेले में कांवरियों और यात्रियों की सुविधा को देखते हुए मुख्यमंत्री ने इसे मेले से पहले चालू करने का सख्त निर्देश दिया था। यही वजह थी कि एजेंसी पिछले कुछ दिनों से दिन-रात युद्धस्तर पर काम में जुटी थी। लेकिन जल्दबाजी के चक्कर में गुणवत्ता से हुए इस कथित समझौते ने एजेंसी की कार्यशैली की कलई खोल दी है। अब स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में इस बात को लेकर चिंता बढ़ गई है कि क्या श्रावणी मेले से पहले यह सड़क सुरक्षित और सफर के लायक हो पाएगी या नहीं।
क्या कहते हैं अधिकारी:
फोरलेन का निर्माण कार्य अभी जारी है और प्रारंभिक तौर पर सड़क के सबग्रेड वर्क में दरार दिखी है। बिटुमिन सेटलमेंट के कारण भी ऐसा हो सकता है। यदि जांच में कोई गंभीर तकनीकी खामी मिली, तो मरम्मत नहीं बल्कि उस हिस्से को तोड़कर दोबारा बनाया जाएगा।
- मनीष कुमार, परियोजना निदेशक, एनएचएआई


