विश्व आदिवासी दिवस : कोल्हान में आदिवासी युवाओं ने थामी आदिवासी अधिकारों के आंदोलन की मशाल
आदिवासी अधिकारों की लड़ाई में कोल्हान के युवाओं ने फिर से अपनी आवाज उठाई है। 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर, जमशेदपुर में आदिवासी आंदोलनकारियों ने भूमि अधिग्रहण कानून 2013 का सख्ती से पालन करने की मांग की है। इन युवाओं ने अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया है।

आदिवासी अधिकारों की लड़ाई लंबे समय से चली आ रही है। अब जब 9 अगस्त को एक बार फिर से विश्व आदिवासी दिवस मनाया जा रहा है तो कोल्हान के आदिवासियों ने एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद करने की ठानी है। अब हक-हुकूक की लड़ाई की मशाल आदिवासी युवाओं ने थाम ली है। जमशेदपुर के युवा आदिवासी आंदोलनकारियों ने अधिकारों की लड़ाई में मोर्चा संभाला है। ये आदिवासी युवा पूर्वजों की तरह जल, जंगल और जमीन के लिए संघर्षरत हैं। इन युवाओं ने भूमि अधिग्रहण कानून 2013 का सख्ती से पालन पर जोर दिया है। आदिवासियों की दलील है कि अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया मुंडा, मानकी और मांझी बाबा की अध्यक्षता में आयोजित ग्रामसभा द्वारा पारित प्रस्ताव के बाद ही शुरू होनी चाहिए। यह मांग उनकी जल, जंगल और जमीन पर आधारित स्वायत्तता को सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम है。
सरना कोड और पांचवीं अनुसूची पर जोर
आदिवासी युवा अपनी धार्मिक पहचान को लेकर भी बेहद गंभीर है। लंबे समय से केंद्र सरकार से सरना धर्म के लिए अलग सरना कोड की मांग की जा रही है, जिसे वे अपनी प्रकृति पूजक संस्कृति की रक्षा के लिए अनिवार्य मानते हैं। वहीं, आदिवासी युवाओं ने स्पष्ट किया कि पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में पेसा कानून के प्रावधानों को नजरअंदाज कर नगर निगम या निकाय चुनाव कराना पूरी तरह असंवैधानिक है। युवाओं की इन मांगों ने यह स्पष्ट कर दिया कि आदिवासी समाज के युवा अब संवैधानिक अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक है और इसके लिए वे किसी भी हद तक संघर्ष करने को तैयार हैं।


