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युद्ध लड़ने को मजबूर रूसी सेना में शामिल भारतीय? भारत ने उठाया मुद्दा तो मिलने लगी छुट्टी

विदेश मंत्रालय का कहना है कि रूस की सेना में काम कर रहे भारतीयों को जल्दी कार्यमुक्त करने को लेकर आवाज उठाई जा रही है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह संख्या 100 के आसपास हो सकती है।

युद्ध लड़ने को मजबूर रूसी सेना में शामिल भारतीय? भारत ने उठाया मुद्दा तो मिलने लगी छुट्टी
Ankit Ojhaरेजाउल एच लस्कर, हिन्दुस्तान टाइम्स,नई दिल्लीMon, 26 Feb 2024 11:47 AM
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रूस की सेना में काम कर रहे भारतीयों की कार्यमुक्त करने की गुहार लगाने की बात को खारिज करते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस मामले को रूसी प्रशासन के सामने प्राथमिकता से उठाया गया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि मॉस्को में भारतीय उच्चायोग के सामने आए मामलों को गंभीरता से लिया गया है। इसके अलावा कई भारतीयों को रूस की सेना से कार्यमुक्त कर दिया गया है। आगे भी जो मामला सामने आएगा, भारत उसे गंभीरता से रूसी प्रशासन के सामने रखेगा जिससे कि सेना में फंसे भारतीयों को जल्द ही छुट्टी दे दी जाए। 

बयान में कहा गया, मुद्दा उठाने के बाद कई भारतीयों को छुट्टी दे दी गई है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि कितने भारतीय अब रूस की सेना में काम कर रहे हैं। रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि रूस की सेना में काम करने वाले भारतीयों की संख्या 100 के आसपास हो सकती है। बीते सप्ताह भारत ने अपने नागरिकों से कहा था कि वे रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष से दूरी बनाए रहें। बताया गया था कि भारतीयों को रूस की सेना में भर्ती होना पड़ रहा है जो कि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ने को विवश हैं। 

विदेश मंत्रालय को पता चला था कि कई भारतीयों ने रूस की सेना के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि भारत ने उनको जल्दी छुट्टी देने का आग्रह किया। रिपोर्ट्स में बताया गया था कि कई भारतीयों ने सेना के हेल्पर के तौर पर काम शुरू किया था जिन्हें बाद में मोर्चे पर भेज दिया गया और अब उन्हें यूक्रेन के साथ युद्ध भी लड़ना पड़ रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया यूक्रेन के साथ युद्ध में कुछ भारतीय घायल हुए और कम से कम दो की जान भी चली गई। 

AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी और कर्नाटक सरकार ने हाल ही में यह मुद्दा विदेश मंत्रालय के सामने उठाया था। उनका कहना था कि भारतीयों को युद्ध में फंसा लिया गया। इनमें से कई कर्नाटक, तेलंगाना और जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं। कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे और कुछ भारतीयों के परिवारों ने कहा था कि यहां से लेोगों को कुछ रिक्रूटमेंट एजेंट के जरिए भेजा गया था। नेपाल के भी करीब 200 लोगों को रूस की आर्मी में भर्ती किया गया था। नेपाल ने बताया था कि उसके 6 नागरिक रूस की सेना में भर्ती होने के बाद मारे गए। 

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