खेल : एशियाई हॉकी चैंपियन भारत के सामने विश्व ताज कब्जाने की चुनौती
आज से शुरू हो रहे हॉकी विश्व कप में भारतीय टीम वेल्स के खिलाफ अपने सफर की शुरुआत करेगी। भारत 51 वर्षों से विश्व कप जीतने की कोशिश कर रहा है। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने कहा कि टीम इस बार पदक जीतने के लिए तैयार है। भारत ने 1975 में एकमात्र विश्व कप जीता है।

विश्व कप : आज से शुरू हो रहे हॉकी महाकुंभ में भारतीय टीम अपने पहले मैच में वेल्स से भिड़ेगी, 51 साल में पोडियम पर पहुंचने का इंतजार कर रहा है भारत एशियाई हॉकी चैंपियन भारत के सामने विश्व ताज कब्जाने की चुनौती
पहला मैच
17 अगस्त को भारतीय टीम इंग्लैंड से और 19 को पाकिस्तान से भिड़ेगी
भारत के प्रदर्शन
01 स्वर्ण सहित तीन पदक अभी तक भारत विश्व कप में जीत चुका है
एम्सटेलवीन (नीदरलैंड्स), एजेंसी। एशियाई चैंपियन भारतीय पुरुष हॉकी टीम एफआईएच विश्व कप में शनिवार से अपने अभियान का आगाज करेगी। 51 साल से दूसरे खिताब का इंतजार कर रहा भारत अपने पहले मैच में वेल्स का सामना करेगा।
मनोबल और तैयारी
तोहफा देने पर नजर : हरमनप्रीत सिंह की टीम की नजर इस बार पदक के सूखे को खत्म करके देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस का तोहफा देने पर है। आठ बार के ओलंपिक चैंपियन भारत ने एकमात्र विश्व कप 1975 में कुआलालंपुर में पाकिस्तान को हराकर जीता था। उससे पहले 1971 में कांस्य और 1973 में रजत पदक अपने नाम किया था लेकिन पिछले 51 साल में पोडियम पर जगह बनाने में भारतीय टीम नाकाम रही है।
भारतीय कप्तान हरमनप्रीत ने कहा है कि टीम उसी मानसिकता और तैयारी के साथ उतरेगी जो पिछले दो ओलंपिक में थी। उन्होंने कहा, हमें यकीन है कि जिस तरह से टोक्यो में 41 साल बाद ओलंपिक पदक जीता था, इस बार विश्व कप में 51 साल की कमी पूरी कर देंगे। विश्व कप में पदक जीतने का दबाव नहीं है बल्कि यह हमारी जिम्मेदारी है।
नए प्रारूप का फायदा
नए प्रारूप में हर पूल से शीर्ष दो टीमें दूसरे दौर में जाएंगी जहां उन्हें चार-चार टीमों के दो समूहों में बांटा जाएगा। इस दौर में दूसरे पूल की टीमों से सामना होगा जिसमें दूसरी क्वालीफाइड टीम के खिलाफ पिछले दौर के अपने पूल के अंक जोड़े जाएंगे। दोनों ग्रुप से शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में जाएंगी। इस प्रारूप में क्वार्टर फाइनल नहीं होने का टीमों को फायदा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा भारतीय टीम के पास इस बार सबसे सुनहरा मौका है। पूल चरण में भारत (आठवीं रैंकिंग) के सामने जिन टीमों की चुनौती है, उनमें सिर्फ इंग्लैंड (तीसरी रैंकिंग) ही उससे आगे है जबकि पाकिस्तान 12वें और वेल्स 15वें स्थान पर है।
भविष्य की संभावनाएं
मनोबल मजबूत : भारत ने राजगीर में पिछले साल एशिया कप जीता, हालांकि प्रो लीग के पिछले सत्र में नौ टीमों में सिर्फ पाकिस्तान के ऊपर आठवें स्थान पर रही। लेकिन विश्व कप से ठीक पहले प्रो लीग के यूरोप चरण में भारत ने मौजूदा विश्व और यूरोपीय चैंपियन जर्मनी को हराया और ओलंपिक चैंपियन नीदरलैंड को भी मात दी। इससे खिलाड़ियों का मनोबल बहुत मजबूत है।
कोच क्रेग फुल्टोन ने प्रो लीग 2025-26 में 33 खिलाड़ियों को आजमाने के बाद विश्व कप टीम चुनी जिसमें भारत के लिए सर्वाधिक 417 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके दिग्गज मिडफील्डर मनप्रीत सिंह भी हैं तो यशदीप सिवाच, मोहित एचएस, शिलानंद लाकड़ा समेत आठ खिलाड़ियों का यह पहला विश्व कप होगा।
टीम की चुनौतियां
श्रीजेश की कमी खलेगी : पी आर श्रीजेश के संन्यास के बाद यह पहला बड़ा टूर्नामेंट है। ऐसे में टीम को उनकी कमी खलेगी। युवा गोलकीपरों मोहित एचएस तथा सूरज करकेरा के सामने चुनौती आसान नहीं होगी। वहीं डिफेंस में अमित रोहिदास और कप्तान हरमनप्रीत सिंह का अनुभव काम आएगा जिनकी ड्रैग फ्लिक पर भी भारत के गोलों का दारोमदार रहेगा। मनप्रीत और हार्दिक सिंह जैसे भरोसेमंद खिलाड़ी मिडफील्ड की कमान संभालेंगे तो फॉरवर्ड में अभिषेक और मनदीप पर नजरें रहेंगी जो 300 अंतरराष्ट्रीय मैचों से सिर्फ 12 मैच दूर हैं।


