ब्यूरो ::: वेंडरों की डिजिटल आईडी सफर में यात्री की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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भारतीय रेलवे ने यात्रियों के साथ कैटरिंग वेंडरों की बदसलूकी पर रोक लगाने के लिए डिजिटल ऑपरेशन शुरू किया है। इसके तहत सभी ठेका कर्मचारियों को स्मार्ट आई-कार्ड जारी किए जाएंगे, जिससे उन्हें पहचानना और गलती करने पर पकड़ना आसान होगा। इससे यात्रियों के साथ मारपीट और रेल संपत्ति की चोरी में कमी आएगी।

ब्यूरो ::: वेंडरों की डिजिटल आईडी सफर में यात्री की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी

ट्रेनों में यात्रियों के साथ कैटरिंग वेंडरों द्वारा बदसलूकी और मारपीट की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए रेलवे बोर्ड ने डिजिटल ऑपरेशन शुरू किया। इसके तहत भारतीय रेल में कार्यरत सभी 7 लाख ठेका कर्मचारियों (1.2 लाख फ्रंटलाइन वेंडर सहित) की गहन डिजिटल स्कैनिंग कर उन्हें विशेष स्मार्ट आई-कार्ड जारी किए जा रहे हैं। इस डिजिटल पहचान से यात्रियों से मारपीट कर भागने वाले वेंडरों को देश के किसी भी कोने से दबोचना आसान होगा। वहीं, यार्डों में होने वाली रेल संपत्ति की चोरी पर भी 85 फीसदी तक लगाम लगेगी। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय रेल में 12 लाख स्थायी कर्मचारी हैं तथा लगभग सात लाख ठेका कर्मी हैं। इस कार्यबल में से 1.2 लाख फ्रंटलाइन अधिकृत वेंडर और हॉकर हैं, जो रोजाना करोड़ों यात्रियों के सीधे संपर्क में आते हैं। रेलवे बोर्ड नए रेल-श्रम सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस के तहत समस्त ठेका कर्मचारियों को स्मार्ट आईडी कार्ड जारी कर रहा है। इसमें उनका स्थायी निवास प्रमाण, पुलिस वेरिफिकेशन और बैंक खाता पोर्टल पर दर्ज होना अनिवार्य कर दिया है। इस प्रक्रिया के बिना कोई वेंडर-ठेका कर्मी रेल परिसर में नहीं घुस पाएगा। लाल रंग के कार्ड केवल ट्रैक और सिग्नलिंग (अत्यंत संवेदनशील) कर्मियों के लिए होंगे। नीला कार्ड स्टेशन सफाई और कमर्शियल और हरा कार्ड ऑन-बोर्ड कैटरिंग और ट्रेनों के भीतर का स्टाफ के लिए होगा।

यात्रियों से मारपीट करने वाले वेंडर हो जाते थे गायब

बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक वेंडर का डिजिटल आईडी कार्ड होने से रेलवे स्टेशनों व ट्रेनों में रेल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आसान होगा। सबसे बड़ी समस्या यह है कि ट्रेनों में ओवरचार्जिंग का विरोध करने पर यात्रियों से मारपीट करने वाले वेंडर गायब हो जाते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। यात्री के रेल मदद ऐप अथवा 139 पर शिकायत दर्ज होते ही उसका स्मार्ट कार्ड तुरंत ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। आरपीएफ उसके सेंट्रलाइज्ड डेटा के जरिए सीधे उसके गृह राज्य की स्थानीय पुलिस से संपर्क कर उसे उसके गांव या घर से दबोचा जा सकेगा। ब्लैकलिस्ट होने के बाद वह पूरे देश के किसी भी रेल जोन में दोबारा नौकरी नहीं पा सकेगा। डिजिटल पहचान का दूसरा सबसे बड़ा फायदा हर साल करोड़ों रुपये की रेल संपत्ति की सुरक्षा करने में होगा। रेलवे के आंतरिक समीक्षा के आंकड़ों के अनुसार, यार्डों और वाशिंग लाइनों से होने वाली रेल संपत्ति (तांबे के तार, कोच के कीमती उपकरण और फिटिंग्स) की चोरी में 60 फीसदी से अधिक मामलों में किसी न किसी रूप में अनाधिकृत या फर्जी आईडी वाले बाहरी तत्वों की संलिप्तता पाई जाती थी। इस पर पूरी तरह से लगाम लेगी.

जबरन वसूली और मारपीट के 11,800 से अधिक मामले दर्ज

जुलाई 2025 से जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय रेलवे नेटवर्क पर ट्रेनों और स्टेशनों के भीतर अवैध वेंडरों और अधिकृत कैटरिंग स्टाफ द्वारा यात्रियों के साथ गाली-गलौज, जबरन वसूली और मारपीट के 11,800 से अधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें से 1,420 से अधिक मामले ऐसे थे जहां यात्रियों के साथ हाथापाई, मारपीट या उनका सामान ट्रेन से बाहर फेंक देने जैसी हिंसक घटनाएं हुईं। विवाद की मुख्य वजहें ओवरचार्जिंग 65 प्रतिशत मामले हैं। 25 फीसदी मामले में अनाधिकृत (बिना लाइसेंस वाले) वेंडरों ने आरक्षित कोचों में घुसकर जगह कब्जाने और टोकने वाले यात्रियों को धमकाने के लिए हिंसा का सहारा लिया।

आरपीएफ का स्मार्ट सर्विलांस

नए नीतिगत बदलावों के तहत रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को पूरी तरह से डिजिटल कार्यप्रणाली अपनाई जा रही है। अब आरपीएफ के जवान पारंपरिक लाठी और डायरी के भरोसे नहीं, बल्कि हाई-टेक गैजेट्स के साथ पटरियों की सुरक्षा करेंगे। हैंडहेल्ड टर्मिनल (एचएचटी) से ऑन-द-स्पॉट वेरिफिकेशन संम्भव होगी। आरपीएफ जवानों को विशेष हैंडहेल्ड टर्मिनल दिए गए हैं। संदेह होने पर वेंडर के स्मार्ट कार्ड के एन्क्रिप्टेड क्यूआर कोड को स्कैन करेंगे, स्क्रीन पर उस कर्मचारी की लाइव ड्यूटी शिफ्ट, वेंडर फर्म का नाम और पुलिस वेरिफिकेशन स्टेटस फ्लैश हो जाएगा।

3,400 से ज्यादा के पास फर्जी आई-कार्ड

देश के 17 जोन में की गई छापेमारी में 14,200 से अधिक संदिग्ध लोग पकड़े गए जो ठेका कर्मचारियों की आड़ में यार्डों, वाशिंग लाइनों और संवेदनशील सिग्नलिंग रूम के आसपास घूम रहे थे। 3,400 से ज्यादा लोगों के पास एक्सपायर्ड (अवधि पार) या लोकल प्रिंटिंग प्रेस से छपवाए गए फर्जी आई-कार्ड मिले।

प्रश्न और उत्तर

रेलवे ने डिजिटल आई-कार्ड की शुरुआत क्यों की है?
रेलवे ने यात्रियों के साथ कैटरिंग वेंडरों की बदसलूकी और मारपीट की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए डिजिटल आई-कार्ड की शुरुआत की है।

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