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25 मई, 2020|8:00|IST

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नई तकनीक से हर रोज 5 लाख अतिरिक्त बर्थ मिलेंगे, 6000 करोड़ रुपए सालाना ईंधन की बचत

रेलवे बोर्ड आगामी अक्तूबर तक सभी एलएचबी कोच में होटल लोड जनरेशन सिस्टम लगाएगी। यह तकनीक ट्रेनों से पावर कार जनरेटर हटाएगी। इससे भविष्य में यात्रियों को प्रतिदिन पांच लाख से अधिक अतिरिक्त बर्थ का इंतजाम होगा। वहीं, ईधन मद मे 6000 करोड़ रुपये सालाना की बचत होगी। इस तकनीक से पर्यावारण प्रदूषण का स्तर भी घटेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, एलएचबी कोच में होटल लोड जनरेशन (एचओजी) सिस्टम लागू होने से ट्रेन के इंजन से विद्युत की आपूर्ति की जाएगी। इस विद्युत आपूर्ति से कोच में एसी, लाइट व अन्य उपकरण चलाए जा सकेंगे। वर्तमान में विद्युत आपूर्ति के लिए ट्रेन के आगे-पीछे दो पावर कार जनरेटर लगाए जाते हैं। एचओजी तकनीक पावर कार जनरेटर हटा देगी। उनके स्थान पर रेलवे एसी-2 अथवा एसी-3 के कोच यात्रियों की मांग के अनुसार लगा सकेगी।

इससे 3500 हजार से अधिक लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों को प्रतिदिन चार से साढ़े पांच लाख अतिरिक्त बर्थ उपलब्ध होंगी। यात्री किराये मद में रेलवे को अतिरिक्त कमाई होगी। इसके अलावा पावर कार जनरेटरों में फुंकने वाले डीजल बचने से रेलवे को सालाना 6000 करोड़ रुपये की बचत होगी। वहीं, जनरेटरों से पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा। रेलवे बोर्ड ने एलएचबी कोच को जर्क फ्री बनाने के बाद एचओजी युक्त बनाने में सफलता हासिल की है।

काफी समय से चल रहा था परीक्षण
रेलवे बोर्ड के रोलिंग स्टॉक राजेश अग्रवाल ने बताया कि सभी एलएचबी में अक्तूबर तक एचओजी तकनीक लगा दी जाएगी। काफी समय से इस तकनीक को लगाने के लिए परीक्षण किया जा रहा था। परीक्षण सफल होने के बाद एलएचबी कोचों को एचओजी युक्त किया जाएगा।

ऐसे काम करती है एचओजी तकनीक
ट्रेन के इलेक्ट्रिक इंजनों में तीन ट्रांसफार्मर (कनवर्टर) होते हैं, जोकि ओवर हेड बिजली के तार से बिजली लेकर इंजन के मोटरों को चलाते हैं। हालांकि, इंजन को चलाने के लिए दो ट्रांसफार्मर पर्याप्त है, जबकि तीसरा ट्रांसफर अतिरिक्त होता है। एचओजी तकनीक में इंजन में लगे स्विच व केबल की मदद से ट्रेन में विद्युत आपूर्ति की जा सकती है। इससे इंजन की बिजली से ही ट्रेन में एसी व रोशनी का इंतजाम हो सकेगा। एलएचबी कोच की विशेषता यह है कि सभी कोच में पावर कनेक्टर होते हैं। इससे सभी कोच को आपस में और इंजन में विद्युत केबल से कनेक्ट करने में समस्या नहीं होगी।

कई ट्रेनों में तकनीक का हो रहा प्रयोग
प्रयोग के तौर पर लखनऊ शताब्दी एक्सप्रेस में कई साल से एचओजी तकनीक काम कर रह है। हालांकि ट्रेन में पावर कार जनरेटर लगे हैं, लेकिन उन्हें चालू नहीं किया जाता है। इसके अलावा कुछ अन्य ट्रेनों में भी यह तकनीक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाई जा रही है। सफलता मिलने के बाद अब सभी एलएचबी कोच में लगाया जाएगा।

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  • Web Title:Indian Railways HOG technology Everyday Gets Five Lakhs More Berth