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ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही पर रेलवे का जोर, रेल मंत्री ने कवच सिस्टम को लेकर दिया बड़ा आदेश

मालूम हो कि भारतीय रेलवे अलग-अलग प्रकार के ट्रैक वाले नेटवर्क संचालित करता है। ऐसे में विभिन्न स्थितियों का अध्ययन करने और उन्हें सुरक्षा प्रणालियों में शामिल करते रहने की आवश्यकता है।

ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही पर रेलवे का जोर, रेल मंत्री ने कवच सिस्टम को लेकर दिया बड़ा आदेश
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Niteesh Kumarएजेंसी,नई दिल्लीSun, 23 Jun 2024 10:51 PM
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भारतीय रेलवे ने स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच का नया वैरिएंट कवच 4.0 डेवलप किया है। ट्रायल हो जाने के बाद इसे शीघ्र ही लगाना शुरू किया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को कवच की प्रगति की समीक्षा की, जिसमें अधिकारियों ने कवच के संस्करण 4.0 की प्रगति के बारे में बताया। साथ ही, वैष्णव ने निर्देश दिया कि कवच 4.0 तैयार होते ही सभी लोको पर मिशन मोड में योजनाबद्ध तरीके से कवच की स्थापना की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इंस्टालेशन की प्रक्रिया में मौजूद मौजूदा सिस्टम को भी कवच ​​4.0 में अपग्रेड किया जाएगा।

स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (ATP) कवच का विकास रेलवे सुरक्षा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। अस्सी के दशक में दुनिया की अधिकांश प्रमुख रेलवे प्रणालियां एटीपी में स्थानांतरित हो गईं। भारतीय रेलवे ने 2016 में ट्रेन टक्कर रोधी प्रणाली के पहले संस्करण की मंजूरी के साथ यह यात्रा शुरू की थी। वर्ष 2019 में सुरक्षा प्रमाणन के उच्चतम स्तर एसआईएल-4 को प्राप्त करने के लिए सिस्टम का परीक्षण किया गया था। भारतीय रेलवे अलग-अलग प्रकार के ट्रैक वाले नेटवर्क संचालित करता है। विभिन्न स्थितियों का अध्ययन करने और उन्हें सुरक्षा प्रणालियों में शामिल करने की आवश्यकता है क्योंकि एक ट्रेन रेलवे नेटवर्क पर कहीं भी यात्रा कर सकती है।

कवच सिस्टम का ऐसे हुआ विकास 
रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिस्टम को 2020 में राष्ट्रीय एटीपी प्रणाली के रूप में मंजूरी दी गई। कोविड काल के बावजूद आगे का परीक्षण और विकास जारी रहा। 2021 में सिस्टम के संस्करण 3.2 को प्रमाणित और क्रियान्वित किया गया था। 2022 की अंतिम तिमाही में दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा के उच्च घनत्व वाले मार्गों पर काम शुरू किया गया था। अभी जो संस्करण लगाया जा रहा है, वह कवच 3.2 है। किसी भी एटीपी प्रणाली को कार्य करने के लिए 5 उपप्रणालियों की आवश्यकता होती है। रेलवे पटरियों के किनारे ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, रेलवे पटरियों के किनारे टावर व रेडियो उपकरण, रेलवे पटरियों पर आरएफआईडी टैग लगाना, रेलवे स्टेशनों पर डेटा सेंटर व सिग्नलिंग प्रणाली के साथ एकीकरण तथा प्रत्येक ट्रेन और लोकोमोटिव पर कवच स्थापित करना।