लाजिस्टिक पार्क में गाड़ियों की रैक लेकर पहुंची मालगाड़ी
रेलवे के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में नई उपलब्धि जुड़ी है। महेंद्रा मोटर कंपनी की कारों को लेकर एक मालगाड़ी सुशीला वेंकटेश्वर लाजिस्टिक पार्क पहुंची। 100 गाड़ियों को लाजिस्टिक पार्क में लाया जाएगा। यह रेलवे का महत्वपूर्ण कदम है, जिससे समय की बचत हो रही है।

रेलवे के बहुचर्चित डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में सोमवार को नई उपलब्धि जुड़ गई है। हाफिजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम हृदयपुर में स्थित सुशीला वेंक्टेश्वर लाजिस्टिक पार्क में महेंद्रा मोटर कंपनी की कारों को लेकर एक मालगाड़ी पहुंच गई है। सौ गाड़ियों को लाजिस्टिक पार्क के 300 किलोमीटर के दायरे में भेजा जाएगा। अब लाजिस्टिक पार्क में निरंतर गाड़ियों को लाया जाएगा। कोलकाता से लेकर सहारनपुर तक रेलवे की ओर से मालगाड़ियों के सफल संचालन के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण किया गया है। करीब 12 एकड़ में फैले इस पार्क को सुशीला वेंकेटेश्वरा इंटीग्रेटिड लाजिस्टिक पार्क फर्म को संचालन के लिए दिया गया है। इस कॉरिडोर पर हाफिजपुर थाना क्षेत्र के गांव हृदयपुर में सुशीला वेंकटेश्वर लाजिस्टिक पार्क का गति शक्ति के नाम से लाजिस्टिक पार्क का निर्माण किया गया है। जहां पर विभिन्न प्रकार के चार वाहनों को लेकर मालगाड़ी आतीं हैं。
लॉजिस्टिक पार्क की उपलब्धियाँ
लॉजिस्टिक पार्क के डायरेक्टर अक्षय चौहान ने बताया कि पार्क को पहले से ही देश की विभिन्न चार पहिया कारों को लेकर ऑर्डर मिल चुके हैं। अब देश के सबसे प्रसिद्ध महिंद्रा कार का भी कंपनी को आर्डर मिला है। सोमवार को 100 गाड़ियों को लेकर एक मालगाड़ी यहां पर आ गई है। बुधवार को भी एक मालगाड़ी गाड़ियों को लेकर आएगी। अब निरंतर लाजिस्टिक पार्क में गाड़ियों के आने का सिलसिला जारी रहेगा।
सड़क मार्ग से समय की बचत
सुशीला वेंकटेश्वर लाजिस्टिक पार्क के डायरेक्टर अक्षय चौहान ने बताया कि कंपनी को देश भर की अलग-अलग कंपनियां चार पहिया वाहन बनाकर कंपनी के माध्यम से देशभर के अलग-अलग कोनों में भेज चुकी हैं। सोमवार को जो महिंद्रा गाड़ियों की मालगाड़ी आ रही है, उसे दिल्ली एनसीआर सहित 300 किलोमीटर के दायरे में भेजने का काम किया जाएगा। जिसमें हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान सहित उत्तर प्रदेश के कई जिले शामिल हैं।उन्होंने बताया कि ट्रेन से कारों के आने में समय काफी कम लगता है। एेसे में कंपनी भी अब कम समय में कारों को अपने विभिन्न जनपदों और राज्यों में खुले शोरूमों या उनके बताए स्थानों पर भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि सड़क मार्ग से माल वाहक ट्रकों में महाराष्ट्र से इन गाड़ियों को आने में करीब एक सप्ताह से अधिक समय लग जाता था, लेकिन अब रेल मार्ग से यह करीब तीन दिन में आ जाती हैं।


