राष्ट्रमंडल खेल : हर्ष और अस्मिता ने सोने से किया हर्षित
जूडो ग्लास्गो, एजेंसी। साइकिल मैकेनिक की बिटिया अस्मिता डे (48 किलो) और दिल्ली के

जूडो ग्लास्गो, एजेंसी। साइकिल मैकेनिक की बिटिया अस्मिता डे (48 किलो) और दिल्ली के मुनिरका के हर्ष सिंह (60 किलो) ने शुक्रवार को ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में तिरंगा फहरा कर भारतीय जूडो में सुनहरा अध्याय जोड़ दिया। पहली बार इन खेलों में चुनौती पेश करने वाले इन दोनों युवा खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीतकर अपने पदार्पण को यादगार बना बना दिया।
अस्मिता का स्वर्ण पदक
त्रिपुरा की 23 वर्षीय अस्मिता शुरुआत में पिछड़ने और पेनाल्टी लगाने के बावजूद शानदार वापसी करते हुए अपनी प्रतिद्वंद्वी नाडा की हेडी क्वाच को नाटकीय मुकाबले में हराकर चैंपियन बनीं। वहीं हर्ष ने भी आखिरी 41 सेकंड में खिताब के दाबेदार ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज को 'वाजा-आरी' के आधार पर शिकस्त देकर पीला तमगा जीता। पहली बार भारत ने इन प्रतिष्ठित खेलों में सोना जीता।
अस्मिता का गोल्डन स्कोर
अस्मिता शुरुआत ने शानदार वापसी करते हुए स्कोर 1-1 से बराबर किया। चार मिनट के मुकाबले में दोनों में से किसी को निर्णायक स्कोर नहीं मिल सका जिससे मुकाबला गोल्डन स्कोर में गया। इसमें पहले स्कोर करने वाले को विजेता घोषित किया जाता है। अस्मिता ने सडन डेथ में आक्रामक प्रदर्शन करके जीत दर्ज की।
हर्ष की दमदार जीत
हर्ष ने अंतिम क्षणों में पलटी बाजी : 23 साल के हर्ष ने जोशुआ के खिलाफ संयम खोए बिना जबर्दस्त खेल दिखाया। शुरुआती चरण में कोई भी खिलाड़ी हावी होता नहीं दिख रहा था लेकिन आखिरी क्षणों में हर्ष ने आक्रामक खेल दिखाया। जोशुआ ओशियाना चैंपियनशिप और ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में कई बार जीत चुके हैं। उन्होंने बर्मिघम राष्ट्रमंडल खेल 2022 में कांस्य जीता था। वह ओलंपियन भी हैं।
सेमीफाइनल में युको से जीतीं
इससे पहले अस्मिता ने रोमांचक मुकाबले में स्कॉटलैंड की समर शॉ को 'युको' के आधार पर हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। एक समय हार की कगार पर पहुंच चुकीं अस्मिता ने शानदार वापसी करते हुए जीत दर्ज की। इससे पहले स्कॉटलैंड की ईवा इविंग को 'इप्पोन' से हराकर अंतिम चार में पहुंची। जूडो में 'इप्पोन' को सर्वोच्च स्कोर माना जाता है जिसके मिलते ही मुकाबला समाप्त हो जाता है। 'युको' अपेक्षाकृत कम अंक वाला स्कोर है।
हर्ष की जीत का सफर
हर्ष ने इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के पेड्रो कार्लोस एंटुन नेटो को 'वाजा-आरी' के आधार पर हराकर फाइनल में प्रवेश किया। क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने के सफर में उन्होंने मलावी के चिकोंडी काथेवेरा को 'इप्पोन' से मात दी। फिर वानुआतु के एलन मोंथुएल को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई।
यामिनी का प्रदर्शन
यामिनी मौर्य (57 किलो) को फाइनल में इंग्लैंड की असेल्या टोपराक से 'इप्पोन' हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। इससे पहले यामिनी ने दक्षिण अफ्रीका की डोने ब्रेटेनबाख को 'इप्पोन' से हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई।
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ट्रैक छोड़ बनीं जूडो क्वीन
त्रिपुरा के बेलोनिया गांव के साइकिल मैकेनिक की बेटी अस्मिता ने अपने करियर की शुरुआत एथलीट से की थी। एक साधारण परिवार में जन्मीं अस्मिता ने आर्थिक चुनौतियों को मात देकर अपने करियर का सबसे बड़ा खिताब जीता। बचपन से खेलों की शौकीन अस्मिता पहले 800 मीटर दौड़ में चुनौती पेश करतीं थीं। जिला स्तरीय चयन ट्रायल के दौरान उन्होंने जूडो में हाथ आजमाए और फिर इसी में करियर बनाने की ठान ली। उन्होंने 2015 में भोपाल स्थित साई सेंटर में कोच यशपाल सोलंकी की देखरेख में अपनी ट्रेनिंग पूरी की। उन्होंने पिछले साल अफ्रीकन ओपन में स्वर्ण पदक और 2024 में जूडो कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता।
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