जीएसटी में तेज रिफंड और आसान ऑडिट की मांग
भारतीय उद्योग की जीएसटी व्यवस्था के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया रही है। डेलॉयट इंडिया के सर्वेक्षण में 99% प्रतिभागियों ने जीएसटी पर सकारात्मक या तटस्थ दृष्टिकोण बताया। हालांकि, कारोबारियों ने रिफंड में देरी और ऑडिट प्रक्रियाओं को लेकर चिंता भी जताई है। जीएसटी को 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया था।

नई दिल्ली, एजेंसी। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था को लेकर भारतीय उद्योग जगत का रुख काफी सकारात्मक रहा है। हालांकि, कारोबारियों ने रिफंड में देरी और ऑडिट संबंधी प्रक्रियाओं को लेकर चिंता भी जताई है। डेलॉयट इंडिया ने एक सर्वेक्षण में यह निष्कर्ष निकाला गया है। जीएसटी को प्रभावी हुए एक जुलाई को नौ वर्ष पूरे होने वाले हैं। इससे पहले डेलॉयट इंडिया की ओर से जारी किए गए 'जीएसटी 9' सर्वेक्षण में कहा गया है कि अब सुधारों का अगला चरण केवल डिजिटलीकरण तक सीमित न रहकर एआई आधारित और आंकड़े-आधारित विवाद निपटान पर केंद्रित होना चाहिए। यह सर्वेक्षण आठ प्रमुख क्षेत्रों के 1,096 उद्योग प्रतिनिधियों और कारोबारियों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है, जिसमें 99 प्रतिशत प्रतिभागियों ने जीएसटी के प्रति सकारात्मक या तटस्थ दृष्टिकोण व्यक्त किया। नकारात्मक राय रखने वालों में एक प्रतिशत से भी कम लोग थे。
जीएसटी पर सुधार
डेलॉयट दक्षिण एशिया के अध्यक्ष (कर) गोकुल चौधरी ने कहा कि जीएसटी ने कर अनुपालन और पारदर्शिता में उल्लेखनीय सुधार किया है। जीएसटी नेटवर्क देश के विश्वसनीय कर ढांचे के रूप में स्थापित हुआ है और जल्द ही एकीकृत तथा बुद्धिमान तकनीकी क्षमताएं वास्तविकता बनेंगी।
करदाताओं की संख्या में वृद्धि
जीएसटी को एक जुलाई, 2017 से लागू किया गया था। इसमें 17 स्थानीय करों और 13 उपकरों को समाहित किया गया था। जीएसटी करदाताओं की संख्या 2017 में 66.5 लाख थी और 2026 में यह बढ़कर लगभग 1.65 करोड़ हो गई है। सर्वेक्षण के अनुसार, अगले चरण के सुधारों में 87 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कर प्रावधानों की स्पष्ट व्याख्या को प्राथमिकता दी। वहीं 61 प्रतिशत ने ऑडिट प्रक्रियाओं में एकरूपता और 36 प्रतिशत ने रिफंड की प्रक्रिया को तेज करने की मांग की।


