सरकारी समिति ने ‘सतलुज फिल्म’ पर प्रतिबंध को सही ठहराया
केंद्र सरकार की समिति ने 'सतलुज फिल्म' पर प्रतिबंध को सही ठहराया है। फिल्म, जो मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है, भारत की संप्रभुता के खिलाफ बताई गई। फिल्म को सुरक्षा चिंताओं के कारण ओटीटी प्लेटफॉर्म 'जी-5' से हटा दिया गया था।

केंद्र सरकार की समिति ने ‘सतलुज फिल्म’ पर लगे प्रतिबंध को सही ठहराया है। फिल्म की समीक्षा के लिए गठित समिति ने प्रतिबंध जारी रखने की सिफारिश की है, क्योंकि फिल्म कथित तौर पर भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ है। सरकारी सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म का निर्देशन हनी त्रेहन ने किया है। फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने वर्ष 1984 से 1994 के बीच पंजाब में हजारों अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार किए जाने के मामलों की पड़ताल की थी। बाद में, वर्ष 1995 में राज्य पुलिस द्वारा कथित तौर पर उनका अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गई थी।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिए जाने के बाद, तीन जुलाई को प्रदर्शन के महज दो दिन बाद ही फिल्म को ओटीटी मंच 'जी-5' से हटा दिया गया था। इसके बाद मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत एक अंतर-विभागीय समिति का गठन किया ताकि फिल्म की विस्तृत जांच कर आगे की कार्रवाई के लिए सुझाव दिए जा सकें।


